Strait of Hormuz Crisis

ट्रंप ने होर्मुज में उतारे युद्धपोत, ईरान को दी विनाशकारी हमले की चेतावनी

इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप का ‘महा-एक्शन’: होर्मुज में उतारे अमेरिकी युद्धपोत, ईरान को दी ‘विनाशकारी’ हमले की चेतावनी

वाशिंगटन/इस्लामाबाद: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता बेनतीजा खत्म होने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।

वार्ता के विफल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा और बड़ा सैन्य फैसला लेते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तुरंत प्रभाव से नाकाबंदी करने का ऐलान कर दिया है।

इसके साथ ही अमेरिका ने सख्त चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन व्यापारिक जहाजों को भी रोका जाएगा, जिन्होंने ईरान को किसी भी प्रकार के ‘टोल टैक्स’ का भुगतान किया है।

होर्मुज में अमेरिकी नौसेना का बड़ा ऑपरेशन शुरू

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि उनके दो विध्वंसक युद्धपोत (Destroyers) होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश कर चुके हैं।

यहां अमेरिकी सेना ने ईरान द्वारा समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर ‘माइन-क्लियरिंग’ अभियान शुरू कर दिया है।

सैन्य अभियान के बारे में जानकारी देते हुए एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि आने वाले कुछ ही दिनों में पानी के भीतर काम करने वाले अत्याधुनिक ड्रोन भी इस फ्लीट का हिस्सा बनेंगे, ताकि वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए एक सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित किया जा सके।

परमाणु कार्यक्रम पर फंसा पेंच, ट्रंप का कड़ा रुख

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर वार्ता की विफलता का कारण स्पष्ट किया है।

ट्रंप ने बताया कि इस्लामाबाद बैठक में अधिकतर बिंदुओं पर सहमति बन गई थी, लेकिन मुख्य पेंच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जाकर फंसा।

ट्रंप ने लिखा, “ईरान ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया, जिस कारण यह वार्ता विफल हुई।

अब समझौता हो या न हो, मेरे लिए होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित करना और वहां से होने वाली अवैध वसूली को रोकना पहली प्राथमिकता है।”

ईरान को ‘नरक’ में भेजने की खुली चेतावनी

ट्रंप ने ईरान पर वैश्विक उगाही का गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि ईरानी नौसेना, वायु सेना और उनके रडार सिस्टम को अमेरिका पहले ही तबाह कर चुका है।

अपनी तीखी और आक्रामक चेतावनी में ट्रंप ने कहा, “खामेनेई और उनके अधिकांश शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं।

अगर अब किसी भी ईरानी बल ने हमारे अमेरिकी जहाजों पर हमला करने की जुर्रत की, तो उसे सीधे नरक में भेज दिया जाएगा।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान के बचे-खुचे सैन्य ढांचे को भी जमींदोज करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर मंडराया संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, क्योंकि दुनिया की 20% तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है।

28 फरवरी को हुए हमलों के बाद से ईरान ने इस रास्ते को लगभग ठप कर रखा है। जहां पहले यहां से रोजाना 100 से अधिक बड़े मालवाहक जहाज गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल एक दर्जन रह गई है।

इस ताज़ा नाकाबंदी और सैन्य तैनाती से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और तेल संकट गहराने की पूरी आशंका है।

ईरान का पलटवार: ‘हम कड़े जवाब के लिए तैयार हैं’

अमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे इस शांति वार्ता में पहले से ही ‘गहरे अविश्वास’ के साथ शामिल हुए थे।

उन्होंने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी तरफ से कोई भी उकसावे की कार्रवाई या हमला हुआ, तो ईरान उसका सबसे कड़ा और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

फिलहाल, होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोतों की गश्त ने युद्ध के दोबारा भड़कने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।

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