वाराणसी: धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा के दर्शन, 10 लाख सिक्कों का बंटेगा खजाना
वाराणसी: धनतेरस पर स्वर्णमयी स्वरूप में भिक्षा दे रही हैं ‘मां अन्नपूर्णा’, भक्तों में बांटा जाएगा 10 लाख सिक्कों और पांच क्विंटल लावा का खजाना”
The Politics Again डेस्क: संतोष सेठ
बाबा विश्वनाथ (भगवान शिव) को भिक्षा देने वाली जगत् जननी मां अन्नपूर्णा धनतेरस के पावन अवसर पर अपने दिव्य और ‘स्वर्णमयी स्वरूप’ में भक्तों पर कृपा बरसा रही हैं।
वाराणसी के बांसफाटक स्थित श्री अन्नपूर्णा मंदिर में साल में सिर्फ एक बार होने वाले इस विशेष दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
शुक्रवार भोर (सुबह 5 बजे) से ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है, जो अगले 5 दिनों तक चलेगा।
बांसफाटक से गोदौलिया तक लगी कतारें
मां अन्नपूर्णा के इस दुर्लभ स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन करने के लिए बृहस्पतिवार दोपहर से ही श्रद्धालु वाराणसी पहुंचने लगे थे।
शुक्रवार भोर में जैसे ही मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर ‘जय मां अन्नपूर्णा’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।
भीड़ का आलम यह है कि मंदिर (बांसफाटक) से लेकर गोदौलिया चौराहे तक श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं।
धनतेरस पर 18:30 घंटे दर्शन, खजाने में बंटेंगे 10 लाख सिक्के
अन्नपूर्णा मंदिर प्रबंधन के अनुसार, धनतेरस के दिन (आज) मां अन्नपूर्णा 18:30 घंटे तक अपने भक्तों को दर्शन देंगी और उन पर अपना खजाना लुटाएंगी।
यह मान्यता है कि धनतेरस के दिन मां अन्नपूर्णा का खजाना (सिक्के और लावा) घर ले जाकर तिजोरी या पूजा स्थल पर रखने से साल भर अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती।
खजाने में क्या-क्या शामिल है?
इस बार भक्तों के लिए विशेष खजाने की व्यवस्था की गई है, जिसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा:
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सिक्के: 10 लाख साधारण सिक्के और विशेष रजत (चांदी) के सिक्के।
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लावा (धान का लावा): 5 क्विंटल लावा प्रसाद के रूप में बांटा जाएगा।
10 नवंबर तक होंगे दर्शन
धनतेरस के इस विशेष दर्शन के बाद, मां अन्नपूर्णा का यह स्वर्णमयी स्वरूप 10 नवंबर तक प्रतिदिन 19:15 घंटे भक्तों के लिए सुलभ रहेगा।
प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष बैरिकेडिंग, पेयजल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि देश भर से काशी आ रहे श्रद्धालुओं को दर्शन में कोई असुविधा न हो।
धनतेरस पर काशी में मां अन्नपूर्णा के ‘स्वर्णमयी स्वरूप’ के दर्शन
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विशेष जानकारी (Key Details) |
विवरण (Description) |
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मंदिर का स्थान |
बांसफाटक (काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप), वाराणसी |
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दर्शन का स्वरूप |
साल में एक बार दिखने वाला स्वर्णमयी स्वरूप |
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दर्शन की अवधि (धनतेरस) |
शुक्रवार भोर 5 बजे से लगातार 18:30 घंटे तक |
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कब तक होंगे दर्शन? |
धनतेरस से लेकर 10 नवंबर तक (रोज 19:15 घंटे) |
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भक्तों में बंटने वाला खजाना |
10 लाख सिक्के (रजत सिक्के सहित) |
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लावा प्रसाद |
5 क्विंटल लावा का होगा वितरण |
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श्रद्धालुओं की कतार |
बांसफाटक से गोदौलिया चौराहे तक भारी भीड़ |











