SP Chief Akhilesh Yadav addressing the media outside Rampur Jail after meeting Azam Khan.

‘जो आजम थे, वो रहेंगे’: अखिलेश यादव की रामपुर मुलाकात का सियासी गणित

“जो आजम थे, वो आजम रहेंगे”: अखिलेश की रामपुर जेल में मुलाकात के पीछे 2027 का सियासी गणित, क्या ओवैसी के ‘डैमेज’ को रोकने की है तैयारी?

रामपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल में बंद पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान से करीब एक साल बाद मुलाकात की।

जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “जो आजम थे, वो आजम हैं, वो आजम रहेंगे।”

नवंबर 2025 से जेल में बंद आजम खान से इस मुलाकात के कई गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच, अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (PDA) फॉर्मूले में ‘A’ यानी अल्पसंख्यक (मुस्लिम) वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड में आजम का निर्विवाद प्रभाव

समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल आजम खान पार्टी का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं। बीते कुछ समय से आजम खेमे में सपा नेतृत्व की दूरी को लेकर नाराजगी की खबरें थीं।

अखिलेश यादव यह भली-भांति जानते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 20 जिलों की 100 विधानसभा सीटों पर 22 फीसदी मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।

  • रुहेलखंड का गणित: मुरादाबाद में 47.12%, रामपुर में 50.57%, संभल में 45% और अमरोहा में 38% मुस्लिम मतदाता हैं।

  • आजम खान के परिवार के साथ खड़े होकर अखिलेश रूठे हुए पुराने नेताओं और अल्पसंख्यक समुदाय को सीधा संदेश देना चाहते हैं।

ओवैसी की आक्रामकता और ‘वोट कटवा’ का डर

अखिलेश यादव की इस सक्रियता को एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी के आक्रामक अभियानों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

ओवैसी लगातार मुस्लिम बहुल इलाकों (कानपुर, श्रावस्ती, आजमगढ़, रामपुर) में रैलियां कर कह रहे हैं कि “अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा।” आगामी 25 अक्टूबर को कैराना और 14 नवंबर को मेरठ में भी ओवैसी की सभाएं प्रस्तावित हैं।

भले ही 2017 (38 सीटों पर जमानत जब्त) और 2022 (96 सीटों पर हार, मात्र 0.43% वोट) के विधानसभा चुनावों में AIMIM को कोई बड़ी जीत न मिली हो, लेकिन उसने सपा को भारी नुकसान पहुंचाया था:

  • जौनपुर की शाहगंज सीट: सपा के शैलेंद्र यादव ललई मात्र 719 वोटों से हार गए, जबकि यहां AIMIM उम्मीदवार को 8 हजार से ज्यादा वोट मिले।

  • बाराबंकी की कुर्सी सीट: सपा के राकेश कुमार वर्मा केवल 217 वोटों से हारे, और ओवैसी के उम्मीदवार ने यहां करीब साढ़े 8 हजार वोट काटे।

2024 के प्रदर्शन को 2027 में दोहराने की चुनौती

आंकड़ों के अनुसार, 2022 के विधानसभा चुनाव में करीब 79% मुसलमानों ने सपा को वोट दिया था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव (इंडिया गठबंधन) में बढ़कर 92% हो गया।

अखिलेश यादव की कोशिश है कि 2027 के महासमर में यह 92% का एकजुट वोट बैंक दरकने न पाए, और इसके लिए आजम खान की नाराजगी दूर करना सबसे पहली शर्त है।

📊 अखिलेश-आजम मुलाकात और मुस्लिम वोट गणित

महत्वपूर्ण सियासी बिंदु (Key Highlights)

विस्तृत विवरण (Details)

🗣️ अखिलेश का बयान

“जो आजम थे, वो आजम हैं, वो आजम रहेंगे।” (मुस्लिम समुदाय को एकजुटता का संदेश)।

📈 पश्चिमी यूपी का वोट बैंक

20 जिलों की 100 विधानसभा सीटों पर 22% मुस्लिम मतदाता निर्णायक।

📍 रुहेलखंड में मुस्लिम आबादी

रामपुर (50.57%), मुरादाबाद (47.12%), संभल (45%), अमरोहा (38%)।

⚖️ AIMIM का ‘डैमेज’ (2022)

शाहगंज (जौनपुर) में सपा 719 वोट से हारी, AIMIM को मिले 8,000+ वोट; कुर्सी (बाराबंकी) में सपा 217 वोट से हारी, AIMIM को मिले 8,500 वोट।

🗓️ ओवैसी की आगामी रैलियां

25 अक्टूबर (कैराना) और 14 नवंबर (मेरठ)।

🗳️ सपा के पक्ष में मुस्लिम वोटिंग ट्रेंड

2022 विधानसभा में 79% ➔ 2024 लोकसभा में 92% (इसे 2027 में कायम रखने की चुनौती)।