विधि आयोग सम्मेलन :सहकारी संघवाद और कानून सुधार पर होगा महामंथन
नई दिल्ली में 23वें विधि आयोग का राष्ट्रीय सम्मेलन: ‘सहकारी संघवाद और कानून संबंधी सुधार’ पर होगा महामंथन”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत का 23वां विधि आयोग (Law Commission of India) देश की कानूनी व्यवस्था और केंद्र-राज्य समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है।
आगामी 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में “सहकारी संघवाद और कानून संबंधी सुधार: राष्ट्रीय और राज्यों के परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में देशभर से राज्य विधि आयोगों के प्रतिनिधि, प्रख्यात न्यायविद, पूर्व न्यायाधीश, नीति निर्माता और अकादमिक जगत के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे।
उपराष्ट्रपति करेंगे उद्घाटन, जुटेंगे कानूनी दिग्गज
इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल की विशेष उपस्थिति रहेगी।
कार्यक्रम में 23वें विधि आयोग का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रहेगा, जिनमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी, सदस्य प्रो. डी.पी. वर्मा और सदस्य सचिव डॉ. अंजू राठी राणा शामिल हैं।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य और संवैधानिक आधार
इस सम्मेलन का मुख्य खाका संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में कानून बनाने की शक्तियों के विभाजन पर आधारित है।
-
राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान: इसका प्रमुख उद्देश्य राज्यों की स्वायत्तता का सम्मान करते हुए यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी सुधार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय, दोनों आवश्यकताओं के अनुकूल हों।
-
संस्थागत समन्वय: संघ और राज्यों के बीच कानूनी सुधारों पर सहयोगात्मक दृष्टिकोण तैयार करना तथा राष्ट्रीय एवं राज्य विधि आयोगों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत बनाना।
दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों में बंटा है कार्यक्रम
कानूनी सुधारों पर गहन विचार-विमर्श के लिए इस सम्मेलन को दो प्रमुख तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया है:
-
पहला तकनीकी सत्र (“कानून में सुधार: आवश्यकताएं और तरीके”): इस सत्र में सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के अनुरूप कानूनों की निरंतर समीक्षा की आवश्यकता पर चर्चा होगी।
-
इसमें न्याय-केंद्रित सुधार, आवधिक वैधानिक समीक्षा और भारत की लोक कल्याण की परंपराओं के आधार पर कानून में सुधार की प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा।
-
दूसरा तकनीकी सत्र (“आवंटित शक्तियां, साझा लक्ष्य: सहयोगात्मक न्यायशास्त्र के साथ भविष्य का निर्माण”): यह सत्र विभाजित विधायी शक्तियों (Divided Legislative Powers) के ढांचे के भीतर सुधारों पर केंद्रित होगा।
-
इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के कानून स्थानीय आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहें और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
यह सम्मेलन भारत के कानूनी ढांचे को ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण और सामाजिक सद्भाव के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
📊23वें विधि आयोग का राष्ट्रीय सम्मेलन
|
महत्वपूर्ण बिंदु (Key Highlights) |
विस्तृत विवरण (Details) |
|
🏛️ आयोजक |
भारत का 23वां विधि आयोग (23rd Law Commission of India) |
|
📌 सम्मेलन का मुख्य विषय |
“सहकारी संघवाद और कानून संबंधी सुधार: राष्ट्रीय और राज्यों के परिप्रेक्ष्य” |
|
🗓️ तिथि व स्थान |
22 अक्टूबर 2026, विज्ञान भवन (नई दिल्ली) |
|
👑 उद्घाटनकर्ता |
उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन |
|
👤 गरिमामयी उपस्थिति |
केंद्रीय विधि मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल |
|
⚖️ विधि आयोग का नेतृत्व |
अध्यक्ष: न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी, सदस्य सचिव: डॉ. अंजू राठी राणा |
|
🎯 मुख्य एजेंडा |
संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत केंद्र-राज्य विधायी शक्तियों का समन्वय और कानून सुधार |











