First Woman Deputy CM of Maharashtra

Sunetra Pawar Profile: ‘वहिनि’ से ‘डिप्टी सीएम’ तक… कौन हैं सुनेत्रा पवार? जो बनने जा रही हैं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री

“अजित पवार की विरासत अब सुनेत्रा के हाथ। 2024 में हारी थीं लोकसभा, अब रचेंगी इतिहास। जानें टेक्सटाइल पार्क से मंत्रालय तक का उनका पूरा सफर”

[मुंबई] — The Politics Again पोलिटिकल डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट 

महाराष्ट्र की राजनीति में आज इतिहास रचा जाने वाला है। दिवंगत एनसीपी प्रमुख अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को एनसीपी (अजित गुट) के विधायक दल का नेता चुन लिया गया है।

सूत्रों की मानें तो वे आज शाम तक ही शपथ लेकर महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री (First Woman Deputy CM) बन सकती हैं।

पति के आकस्मिक निधन (28 जनवरी) के बाद, सुनेत्रा पवार का यह नया अवतार उन्हें केवल एक ‘सहानुभूति का चेहरा’ नहीं, बल्कि एक ‘निर्णायक शक्ति’ के रूप में स्थापित कर रहा है।

कौन हैं सुनेत्रा पवार? (Early Life & Background)

सुनेत्रा का जन्म 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) के एक प्रतिष्ठित मराठा परिवार में हुआ था।

  • राजनीतिक खून: राजनीति उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता बाजीराव पाटिल और भाई पदमसिंह पाटिल (पूर्व गृह मंत्री) महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता रहे हैं।

  • शिक्षा: उन्होंने औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) के एसबी कॉलेज से बी.कॉम की डिग्री हासिल की है।

  • विवाह: 1985 में उनकी शादी अजित पवार से हुई। यह रिश्ता अजित के चाचा शरद पवार और सुनेत्रा के भाई पदमसिंह पाटिल की गहरी दोस्ती का नतीजा था।

समाजसेवा से सियासत तक:

‘वहिनि’ का सफर राजनीति में सक्रिय आने से पहले, बारामती में उन्हें ‘वहिनि’ (भाभी) के नाम से जाना जाता था। उन्होंने जमीनी स्तर पर बड़े काम किए:

  1. टेक्सटाइल पार्क: 2008 में बारामती में 65 एकड़ में ‘हाईटेक टेक्सटाइल पार्क’ बनवाया। आज यहाँ 15,000 लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं।

  2. निर्मल ग्राम: पवार खानदान के पैतृक गांव ‘काठेवाड़ी’ को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाने और ‘निर्मल ग्राम’ का दर्जा दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही।

राजनीतिक करियर: हार, जीत और अब सबसे बड़ा पद

सुनेत्रा पवार का सक्रिय राजनीतिक करियर बहुत पुराना नहीं है।

  • पहला चुनाव (2024): एनसीपी में फूट के बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव में वे बारामती सीट से अपनी ननद सुप्रिया सुले के खिलाफ मैदान में उतरीं। यह एक ‘पवार बनाम पवार’ की लड़ाई थी, जिसमें उन्हें हार मिली।

  • राज्यसभा (June 2024): हार के बावजूद पार्टी ने उन्हें जून 2024 में राज्यसभा भेजा। संसद में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है—उन्होंने 126 प्रश्न पूछे (राष्ट्रीय औसत 92 से ज्यादा) और 69% उपस्थिति दर्ज कराई।

सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना यह साबित करता है कि एनसीपी (अजित गुट) अब पूरी तरह उनके और उनके बेटों (पार्थ और जय) के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा।

अब देखना यह है कि वह अजित दादा की ‘आक्रामक कार्यशैली’ की जगह अपनी ‘सौम्य और विकासवादी’ छवि से पार्टी को कैसे संभालती हैं।

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