Parliament Special Session

संसद का विशेष सत्र: भाजपा ने सांसदों को जारी किया Three Line Whip

संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक: महिला आरक्षण पर बड़े संशोधन की तैयारी, लोकसभा सीटें बढ़कर हो सकती हैं 816

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। इस अहम सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गंभीरता दिखाते हुए अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को ‘तीन लाइन का व्हिप’ (Three-line whip) जारी कर दिया है।

इसके तहत सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को इन तीन दिनों के दौरान सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का सख्त निर्देश दिया गया है।

लोकसभा सीटों के विस्तार की बड़ी योजना

सूत्रों के अनुसार, इस विशेष सत्र का मुख्य एजेंडा ‘महिला आरक्षण कानून’ (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में महत्वपूर्ण संशोधन करना है।

सरकार का लक्ष्य 2029 के आम चुनाव से पहले इस ऐतिहासिक आरक्षण को पूरी तरह से लागू करना है।

मिडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लोकसभा की कुल सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।

इन बढ़ी हुई सीटों में से एक-तिहाई यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।

महिला आरक्षण को बिना देरी के लागू करने के लिए सरकार 2027 की जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन (Delimitation) कराने की रूपरेखा तैयार कर रही है।

सांसदों को सख्त निर्देश, मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी

भाजपा नेतृत्व ने अपने सांसदों को भेजे गए संदेश में स्पष्ट कर दिया है कि इस विशेष सत्र के दौरान किसी भी सांसद को अवकाश नहीं दिया जाएगा।

सांसदों से व्हिप का सख्ती से पालन करने और चर्चा के दौरान सदन में पूरी तरह से डटे रहने को कहा गया है।

बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन प्रस्तावों को पहले ही अपनी मंजूरी दे दी है, और अब इन्हें कानून का अमलीजामा पहनाने के लिए संसद के पटल पर रखा जाएगा।

विपक्ष ने उठाई सर्वदलीय बैठक की मांग

दूसरी ओर, अचानक बुलाए गए इस विशेष सत्र पर विपक्ष ने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सत्र शुरू होने से पहले ‘सर्वदलीय बैठक’ बुलाने की मांग की है।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने बिना उन्हें विश्वास में लिए इतना बड़ा फैसला ले लिया है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने भी इस कदम पर चिंता व्यक्त की है।

उनका कहना है कि बिना उचित विचार-विमर्श और सर्वसम्मति के परिसीमन जैसे बड़े कदम उठाने से राज्यों के लोकतांत्रिक और जनसांख्यिकीय संतुलन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, तमाम विरोधों के बावजूद सरकार इस ऐतिहासिक कानून को 2029 तक धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रही है।

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