संदेशखाली कांड: गवाह के बेटे की संदिग्ध मौत, ‘सुनियोजित हत्या’ का आरोप

“संदेशखाली गैंगरेप और ईडी टीम पर हमले के अहम गवाह भोलानाथ घोष बुधवार सुबह एक संदिग्ध सड़क हादसे में बाल-बाल बचे, जबकि उनके छोटे बेटे सत्यजीत (22) और कार चालक शहनूर मोल्ला की मौके पर ही मौत हो गई”

पश्चिम बंगाल 12 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

यह भीषण दुर्घटना उत्तर 24 परगना ज़िले के बसंती हाईवे पर बॉयामरी पेट्रोल पंप के पास सुबह करीब 9:17 बजे हुई। इस क्षेत्र में सीसीटीवी कवरेज का अभाव है, जिससे जांच में जटिलता आने की आशंका है।

हादसा या साज़िश? परिवार और गवाह के आरोप

पुलिस के अनुसार, 16 पहियों वाले एक ट्रक ने घोष की कार को जोरदार टक्कर मारी और उसे घसीटता हुआ राजमार्ग के किनारे स्थित जलाशय में गिरा दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का मलबा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रक ड्राइवर मौके से फरार हो गया, जबकि ट्रक जलाशय के ऊपर खतरनाक तरीके से लटका मिला।

घोष परिवार ने इस घटना को एक सुनियोजित हत्या की साज़िश बताया है। भोलानाथ घोष के बड़े बेटे बिस्वजीत घोष ने दावा किया कि उनके पिता, जो तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और फिलहाल जेल में बंद शेख शाहजहां के खिलाफ गवाही देने जा रहे थे, को निशाना बनाया गया है।

बिस्वजीत के अनुसार, जब से उनके पिता ने सीबीआई के साथ सहयोग करना शुरू किया है, शाहजहां और उनके समर्थक परिवार को लगातार धमकियां दे रहे हैं।

बिस्वजीत ने आरोप लगाया कि शाहजहां के दो करीबी सहयोगी, तृणमूल नजात पंचायत समिति की प्रमुख सबिता रॉय और उनके डिप्टी मुस्लिम शेख ने शाहजहां के निर्देश पर इस हमले की साजिश रची।

परिजनों के मुताबिक, ट्रक चलाने वाला अलीम मोल्ला उनका परिचित था और उसने जानबूझकर टक्कर मारी। अलीम, अब्दुस समद और नज़रुल मोल्ला तीनों फरार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अलीम मोल्ला शाहजहां का करीबी है और ईडी अधिकारियों पर हमले वाले दिन भी उसके घर के बाहर मौजूद था।

गवाह भोलानाथ घोष, जिन्हें चोटें आईं और बाद में अस्पताल से छुट्टी मिल गई, ने भी इन आरोपों को दोहराया। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे मारने की योजना बनाई थी। इतनी रफ्तार और उस एंगल से ट्रक आ ही नहीं सकता था। मैं ड्राइवर को जानता हूँ। यह प्लान किया गया अटैक है।”

विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया

इस घटना पर विपक्षी दल भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि ट्रक शाहजहां के करीबी सहयोगी अब्दुल हलीम मोल्लाह चला रहा था, जो सीबीआई के रिकॉर्ड में भगोड़ा दर्ज है।

उन्होंने इसे “हत्या की एक सोची-समझी साजिश” करार दिया। भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने ममता बनर्जी सरकार पर शाहजहां को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि शाहजहां जेल में बैठकर गवाहों को खत्म करवा रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना को शाहजहां से जुड़े मामलों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का पर्याप्त कारण बताया।

उन्होंने दावा किया कि जेल के अधिकारी शाहजहां जैसे अपराधियों को जेल से मोबाइल फोन का उपयोग करने और अपना “कारोबार” चलाने की सुविधा देते हैं। अधिकारी ने सीबीआई से अपील की कि वह इन मामलों को उच्चतम न्यायालय के माध्यम से राज्य से बाहर स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर करे।

पुलिस जांच जारी, साज़िश की आशंकाएं प्रबल

बशीरहाट के एसपी हुसैन मेहदी रहमान ने बताया है कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है और ट्रक के ड्राइवर व मालिक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

हालांकि, कई बिंदु इस घटना में साज़िश की आशंका को पुख्ता करते हैं:

  • गवाह के रूट पर उसी समय ट्रक का होना।

  • टक्कर उस स्थान पर मारी गई जहाँ सीसीटीवी नहीं था।

  • ट्रक ड्राइवर अलीम मोल्ला का घटना के बाद परिवार सहित फरार हो जाना।

  • अलीम मोल्ला का शाहजहां से संबंध होना।

यह घटना संदेशखाली में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराधों और प्रशासन की मिलीभगत की एक और कड़ी को उजागर करती है। यह दर्शाता है कि सत्ता की गलियों में पलने वाले अपराधी, जेल की सलाखों के पीछे से भी गवाहों को डराने और उनके मुंह बंद करने की क्षमता रखते हैं, जिससे न्याय की राह में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

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