जन्म और मृत्यु पंजीकरण में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार नियमों को सख्त करने जा रही है। 2 साल से अधिक की देरी पर अब फर्स्ट-क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश से ही प्रमाण पत्र बन सकेगा।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना होगा सख्त: 2 साल से अधिक की देरी पर अब कोर्ट से लेनी होगी मंजूरी, सरकार बदल रही है नियम”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
अगर आपके घर में किसी बच्चे का जन्म हुआ है या किसी परिजन की मृत्यु हुई है, तो उसका रजिस्ट्रेशन समय पर करा लेना ही बेहतर है।
केंद्र सरकार ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम’ (Registration of Births and Deaths Act) में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है।
इस प्रस्तावित संशोधन के तहत, यदि जन्म या मृत्यु की घटना के दो साल के भीतर पंजीकरण (Registration) नहीं कराया जाता है, तो इसके लिए एक सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा।
गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष पेश किया गया है।
नए नियम लागू होने के बाद, दो साल की देरी वाले मामलों में सिर्फ ‘फर्स्ट-क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट’ (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश पर ही रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।
इस मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम को रियल-टाइम (Real-time) बनाना है।
नीति निर्माण में सुविधा: जन्म और मृत्यु का सटीक और समयबद्ध डेटा सरकार को बेहतर नीतियां बनाने और प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है।
फर्जीवाड़े पर रोक: देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन में सख्ती और ज्यूडिशियल जांच-पड़ताल बढ़ने से प्रमाण पत्रों के गलत इस्तेमाल और फर्जीवाड़े पर सीधा प्रहार होगा।
वर्तमान में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत जन्म और मृत्यु का पंजीकरण 21 दिनों के अंदर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास कराना अनिवार्य है।
देरी होने पर अलग-अलग समय अवधि के लिए अलग-अलग नियम हैं। प्रस्तावित बदलावों को आप नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझ सकते हैं:
| देरी की अवधि | वर्तमान नियम (आवश्यक मंजूरी) | प्रस्तावित नया नियम |
| 21 दिनों के भीतर | स्थानीय रजिस्ट्रार (सामान्य प्रक्रिया) | कोई बदलाव नहीं |
| 30 दिन से 1 साल तक | डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार की लिखित मंजूरी, तय फीस और स्व-प्रमाणित (Self-attested) दस्तावेज | कोई बदलाव नहीं |
| 1 साल से 2 साल तक | डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की मंजूरी | कोई बदलाव नहीं |
| 2 साल से अधिक | डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), SDM या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की मंजूरी | केवल फर्स्ट-क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य |
प्रस्तावित संशोधन पास होने के बाद सेक्शन 13(3) के तहत मौजूदा व्यवस्था बदल जाएगी और दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए आम लोगों को मजिस्ट्रेट कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
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