PM Modi and President Xi Jinping offer to act as mediators to resolve the ongoing Russia-Ukraine conflict during bilateral meetings with Russian President Vladimir Putin in New Delhi.
रूस-यूक्रेन युद्ध: पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने की पुतिन से मध्यस्थता की पेशकश, क्रेमलिन ने किया स्वागत”
नई दिल्ली: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से चल रहे भीषण युद्ध को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है।
क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति भवन) ने रविवार को आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस टकराव को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है।
यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के इतर, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों के दौरान हुआ।
क्रेमलिन के प्रेस सचिव (प्रवक्ता) दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने मोदी और शी जिनपिंग की इस सकारात्मक पहल का स्वागत किया है।
द्विपक्षीय बैठकों के दौरान पुतिन ने दोनों नेताओं को यूक्रेन के साथ चल रहे टकराव के मौजूदा हालात की विस्तृत जानकारी दी।
सबसे बड़ी बात यह रही कि क्रेमलिन ने भविष्य में शांति वार्ता के लिए ‘बातचीत की मेज’ पर लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया है।
स्पुतनिक इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी और शी दोनों ने ही इस संकट के समाधान में गहरी दिलचस्पी दिखाई और सक्रिय रूप से मदद की पेशकश की।
यूं तो नई दिल्ली और बीजिंग पहले भी मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन इस बार का समय बेहद अहम माना जा रहा है।
रूस में जल्द ही विधायी चुनाव होने की उम्मीद है, जो यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद देश के पहले चुनाव होंगे। इससे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मध्यस्थता की कोशिश की थी और पिछले साल अगस्त में पुतिन के साथ शिखर बैठक की थी, लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद भी वह बेनतीजा रही।
इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने शनिवार को व्लादिमीर पुतिन से आमने-सामने मिलने की इच्छा जताई थी।
हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता पेस्कोव ने फिलहाल ऐसी किसी सीधी मुलाकात की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।
गौरतलब है कि पुतिन इससे पहले भी ज़ेलेंस्की के साथ आमने-सामने की बातचीत के प्रस्तावों को लगातार ठुकराते रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि भारत और चीन की यह संयुक्त कूटनीतिक पहल इस युद्ध को रोकने में कितनी कारगर साबित होती है।
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