500 करोड़ का सिरप घोटाला : रसूखदारों के संरक्षण में दुबई भागा मुख्य आरोपी

“नशीले कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी करने वाले एक बड़े सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने न केवल सरकारी तंत्र में पैठ जमाई, बल्कि ड्रग इंस्पेक्टरों और राजनेताओं की मिलीभगत से बांग्लादेश तक तस्करी का जाल बिछाया”

वाराणसी/रांची 22 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

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फर्जीवाड़ा 13 जिलों की 177 फर्जी फर्मों के नाम पर बिलिंग की गई।
मिलीभगत आधा दर्जन नेता, एक माफिया और दो ड्रग इंस्पेक्टरों को रिश्वत देने के सबूत मिले हैं।
संरक्षण रसूखदारों की मदद से मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल दुबई भागने में सफल रहा।
दस्तावेज सीए (CA) विष्णु अग्रवाल और शुभम के घर से फर्जी लेनदेन और एबॉट कंपनी के बिल बरामद हुए हैं।

2.24 करोड़ बोतलें और 500 करोड़ का साम्राज्य

ईडी की जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला जायसवाल ने रांची स्थित अपनी फर्म ‘शैली ट्रेडर्स’ के माध्यम से अकेले 2.24 करोड़ नशीले सिरप की बोतलों की अवैध बिक्री की। इस काले कारोबार की अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

तस्करी का तरीका बेहद शातिराना था। शुभम ने 13 जिलों की 177 फर्जी फर्मों के नाम पर कागजी बिलिंग की। हकीकत में सिरप की यह खेप उत्तर प्रदेश और झारखंड से होते हुए त्रिपुरा भेजी जाती थी, जहाँ से सीमा पार बांग्लादेश में इसकी तस्करी की जाती थी।

नेताओं, माफिया और ड्रग इंस्पेक्टरों का ‘नेक्सस’

शुभम जायसवाल के पुश्तैनी आवास और उसके चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विष्णु अग्रवाल के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ईडी को एक ‘सीक्रेट डायरी’ और महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। इसमें:

  • आधा दर्जन से अधिक नेताओं और एक बहुचर्चित माफिया को दी गई रिश्वत का ब्योरा है।

  • दो ड्रग इंस्पेक्टरों की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। शक है कि इन इंस्पेक्टरों ने ही शुभम को उन फर्मों का डेटा दिया था जो बंद हो चुकी थीं या जिनके लाइसेंस निरस्त हो चुके थे, ताकि उन पर फर्जी बिलिंग की जा सके।

  • ईडी अब वाराणसी में बीते तीन वर्षों में तैनात रहे ड्रग इंस्पेक्टरों की कुंडली खंगाल रही है।

फार्मा कंपनियां भी रडार पर, एबॉट की मुश्किलें बढ़ीं

इस मामले में सबसे गंभीर पहलू बड़ी फार्मा कंपनियों की भूमिका है। हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित एबॉट फार्मास्युटिकल्स और पोंटा साहिब स्थित लेबोरेट फार्मा पर एफआईआर की तैयारी चल रही है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार: जब एबॉट के पुराने स्टॉकिस्ट (विभोर राणा और विशाल सिंह) पुलिस की पकड़ में आए, तो कंपनी ने जांच करने के बजाय शुभम जायसवाल को अपना नया ‘सुपर स्टॉकिस्ट’ बना दिया और आपूर्ति जारी रखी।

दुबई भाग निकला मास्टरमाइंड, रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी

राजनीतिक और माफिया संरक्षण के चलते मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल देश छोड़कर दुबई भागने में सफल रहा। ईडी अब उसे वापस लाने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

मुख्य निष्कर्ष और कार्रवाई:

  • अवैध बिलिंग: 177 फर्जी फर्मों का इस्तेमाल।

  • बरामदगी: छापेमारी में एबॉट कंपनी के भारी मात्रा में ओरिजिनल बिल और फर्जी लेनदेन के कागजात मिले।

  • अगला कदम: ड्रग इंस्पेक्टरों से पूछताछ और संबंधित फार्मा कंपनियों के अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा।


संपादकीय टिप्पणी: यह मामला देश की फार्मास्युटिकल सुरक्षा और नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। ईडी की अगली कार्रवाई में कई सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।

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