National

RELOS समझौता लागू : भारत-रूस करेंगे एक-दूसरे के सैन्य बेस का इस्तेमाल

भारत-रूस के बीच ‘रिलॉस’ (RELOS) समझौता लागू: एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का करेंगे इस्तेमाल, दुनिया की उड़ी नींद

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

बदलती वैश्विक कूटनीति और रक्षा समीकरणों के बीच भारत और रूस ने एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है, जिसने दुनिया भर के कई देशों और खास तौर पर विरोधी मुल्कों की नींद उड़ा दी है।

दरअसल, भारत और रूस के बीच ‘रिलॉस’ यानी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट (RELOS) समझौता पूरी तरह से लागू हो चुका है।

इसके तहत अब दोनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के एयरबेस, नेवल बेस (नौसैनिक अड्डों) और सैन्य ठिकानों का पूरी ऑपरेशनल क्लेरिटी के साथ इस्तेमाल कर सकेंगे।

क्या है इस रक्षा डील की असली ताकत? इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक क्षमता है।

इस डील के लागू होने के बाद अब भारत और रूस एक साथ 3000 सैनिक, 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट (लड़ाकू विमान) और 5 वॉरशिप्स (युद्धपोत) एक-दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकते हैं।

बात सिर्फ तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरी ‘युद्ध मशीन’ को संचालित करने के लिए पूरा लॉजिस्टिक सपोर्ट भी मिलेगा।

इसमें रिफ्यूलिंग (ईंधन भरना), रिपेयर (मरम्मत), मेंटेनेंस, मेडिकल और ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं शामिल हैं।

यानी भारतीय सेना अब सिर्फ अपने क्षेत्र तक सीमित न रहकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से ऑपरेट करने में सक्षम हो गई है।

यह डील इतनी जरूरी क्यों थी?

सामरिक जानकारों के अनुसार, इस डील के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:

  1. बदलती दुनिया का नया पावर गेम: आज हर प्रमुख देश अपने सप्लाई रूट्स और सैन्य पहुंच (मिलिट्री रीच) को सुरक्षित करने में जुटा है।

  2. चीन का बढ़ता प्रभाव: चीन लगातार एशिया और इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए अपनी सैन्य और सामरिक मौजूदगी बढ़ाना नितांत आवश्यक था।

  3. रूस की रणनीति: पश्चिमी देशों के भारी दबाव और प्रतिबंधों के बीच रूस को एक ऐसे पार्टनर की जरूरत थी जिस पर पूरा भरोसा किया जा सके, और भारत इस समीकरण में सबसे मजबूत व भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

भारत को क्या मिला? ‘स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी’ का कड़ा संदेश

इस डील से भारत को सबसे बड़ा फायदा ‘ग्लोबल रीच’ (वैश्विक पहुंच) का हुआ है। रूस के पास आर्कटिक से लेकर यूरोप तक फैले सैन्य बेस हैं।

भविष्य में नए समुद्री व्यापारिक रास्तों और संसाधनों के नजरिए से आर्कटिक का क्षेत्र बेहद अहम है, जहां अब भारत को एक्सेस मिल सकेगा।

दूसरा बड़ा फायदा लॉजिस्टिक सपोर्ट का है, क्योंकि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि निर्बाध सप्लाई चेन से जीते जाते हैं।

सबसे अहम बात यह है कि भारत ने अमेरिका के साथ ‘लेमोआ’ (LEMOA) समझौता किया हुआ है और अब रूस के साथ ‘रिलॉस’ (RELOS) लागू किया है।

यह भारत की ‘स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी’ (रणनीतिक स्वायत्तता) को दर्शाता है। भारत न पूरी तरह किसी एक गुट के साथ है और न किसी के खिलाफ, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार हर बड़ी ताकत के साथ संतुलन बनाकर चल रहा है।

दुश्मनों की क्यों बढ़ी चिंता? विरोधी देशों की चिंता का सबसे बड़ा कारण भारत की लगातार बढ़ती रणनीतिक पहुंच है।

रिलॉस समझौते के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अब केवल दक्षिण एशिया तक सिमटा हुआ देश नहीं है, बल्कि वह यूरोप, आर्कटिक और व्यापक एशिया में भी सक्रिय रूप से अपनी सैन्य और लॉजिस्टिक उपस्थिति दर्ज करा सकता है।

Santosh SETH

Recent Posts

रायगढ़ हादसा: दिवेआगर बीच पर पिकनिक मनाने गए 8 छात्रों की डूबने से मौत

महाराष्ट्र के रायगढ़ में बड़ा हादसा: पिकनिक मनाने गए 8 छात्रों की समुद्र में डूबने…

1 day ago

यूपी भाजपा : विभिन्न मोर्चों की नई टीम, अनस उस्मानीअल्पसंख्यक अध्यक्ष

यूपी भाजपा में बड़े बदलाव: लंबे इंतजार के बाद विभिन्न मोर्चों की नई टीम घोषित,…

1 day ago

भदोही: ‘मुसहर’ बताकर प्रसूता को अस्पताल से भगाया, डॉक्टर बर्खास्त

भदोही: 'मुसहर' बताकर प्रसूता को अस्पताल से भगाया, सड़क पर हुई डिलीवरी; ईएमओ बर्खास्त, सीएमएस…

1 day ago

जौनपुर में धूमधाम से मनेगी गांधी-शास्त्री जयंती, अनेक कार्यक्रम तय

जौनपुर में धूमधाम से मनेगी गांधी और शास्त्री जयंती: प्रभात फेरी, 5 किमी रेस और…

1 day ago

जौनपुर: वाटरशेड विकास से किसानों की आय में 50% वृद्धि, भूजल स्तर सुधरा

जौनपुर: जल संरक्षण से संवर रहा किसानों का भविष्य, 'रिफॉर्म उत्सव' के जरिए वाटरशेड विकास…

1 day ago

छत्तीसगढ़: ASI और राज्य सरकार के बीच ऐतिहासिक MOU

छत्तीसगढ़ में विरासत पर्यटन को बड़ा बूस्ट: ASI और राज्य सरकार के बीच ऐतिहासिक MOU,…

1 day ago