RBI Alert Crude Oil Price Hike

RBI का अलर्ट: कच्चे तेल में उबाल, बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

कच्चे तेल की आग से झुलसेगी आम आदमी की जेब! RBI गवर्नर का बड़ा अलर्ट- ‘लंबे समय तक नहीं रुकेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम’

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के संकट का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारत में जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।

‘लंबे समय तक बोझ नहीं उठा सकती सरकार’

स्विट्जरलैंड में ‘स्विस नेशनल बैंक’ और ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष’ (IMF) द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने यह चिंता जाहिर की।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा लागत से अनिश्चित काल तक बचाकर नहीं रख पाएगी।

उन्होंने अलर्ट करते हुए कहा, “अगर मध्य पूर्व का यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो मूल्य वृद्धि का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने (पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने) में सरकार को बस कुछ ही समय लगेगा।”

तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है भारत, अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव

भारत वर्तमान में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी अधिकांश कच्चे तेल की आवश्यकताओं के लिए आयात (Import) पर निर्भर है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जल परिवहन मार्ग है, वहां व्यवधान के कारण भारत की आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा जोखिम मंडरा रहा है। कच्चे तेल की इन ऊंची कीमतों के कारण:

  • भारत का ऊर्जा आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है।

  • रुपये (Rupee) की कीमत पर भारी दबाव पड़ रहा है।

  • परिवहन (Transport) और विनिर्माण (Manufacturing) लागत बढ़ने से मुद्रास्फीति (महंगाई) बेकाबू होने का खतरा है।

वर्तमान में कौन उठा रहा है घाटा?

फिलहाल, आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए केंद्र सरकार और सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) कच्चे तेल की कीमतों में हुई वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही हैं।

सरकार ने पहले ही ईंधन पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) कम कर दिया है। वहीं, तेल विपणन कंपनियां भारी घाटे के बावजूद पेट्रोल और डीजल को बाजार दर से कम दामों पर बेच रही हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है और कई अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों में पहले ही वृद्धि की जा चुकी है।

अब पेट्रोल-डीजल की बारी आ सकती है, जिससे आम आदमी का बजट बुरी तरह बिगड़ सकता है।