राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एफआईआर पर उठे सवाल, बड़ा खुलासा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का महाघोटाला: FIR पर उठे गंभीर सवाल, 40 दिन में 70 बार पार हुई रकम, मामले पर PMO की पैनी नजर”
अयोध्या: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
इस मामले में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज से हुए खुलासे बताते हैं कि यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित महाघोटाला है, जो पिछले कई वर्षों से चल रहा था।
FIR में खामियां: ट्रस्ट को अपने ही कर्मियों की जानकारी नहीं?
इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसमें किसी भी आरोपी के पिता का नाम और पूरा पता दर्ज नहीं किया गया है। एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन द्वारा दर्ज कराई गई है।
एफआईआर में कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है:
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अविनाश शुक्ला
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अनुकल्प मिश्रा
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लवकुश मिश्रा
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मनीष कुमार यादव
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करुणेश पांडेय
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रमाशंकर मिश्रा
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सुभाष श्रीवास्तव
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रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
ये सभी आरोपी सीधे तौर पर मंदिर प्रबंधन से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या ट्रस्ट के पास अपने ही कर्मियों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद नहीं है?
सभी आरोपियों के पते में ‘अज्ञात’ दर्ज किया गया है, जो ट्रस्ट की लापरवाही की ओर इशारा करता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगा, फिर बैंक कर्मी ‘अज्ञात’ क्यों?
एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं लगाई गई हैं।
कानूनी रूप से यह धारा तभी लगती है जब मामले में कोई ‘सरकारी कर्मचारी’ या ‘पब्लिक सर्वेंट’ शामिल हो।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी धांधली में बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की स्पष्ट मिलीभगत है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एफआईआर में 9वें नंबर पर आरोपी को ‘अज्ञात’ रखा गया है।
बैंक कर्मियों को नामजद न करना यह शक पैदा करता है कि क्या किसी बड़े चेहरे को बचाने का खेल खेला जा रहा है?
PMO की निगरानी और सधे हुए शब्द
चूंकि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया है, इसलिए इस पूरे मामले की सीधी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) कर रहा है।
पीएमओ को नियमित रिपोर्ट भेजी जा रही है और उनके अधिकारियों ने अपने स्तर से भी जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों का दावा है कि एफआईआर में दी गई तहरीर के शब्द बेहद नपे-तुले और सधे हुए हैं। बहुत कम शब्दों में एसआईटी (SIT) की आख्या और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए गबन का आरोप लगाया गया है। कहा जा रहा है कि तहरीर के यह शब्द ऊपर से मिले निर्देशों के बाद ही लिखे गए हैं।
सीसीटीवी का बड़ा खुलासा: 40 दिन में 70 बार चोरी
जांच में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सीसीटीवी फुटेज से हुआ है। एसआईटी और पुलिस के कब्जे में मौजूद फुटेज बताते हैं कि महज 40 दिनों के भीतर आरोपियों ने करीब 70 बार चोरी की वारदात को अंजाम दिया। कैमरे में आरोपी साफ तौर पर रकम पार करते हुए कैद हुए हैं।
अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि 40 दिन में 70 बार चोरी हुई है, तो पिछले दो-तीन वर्षों से चल रहे इस खेल में कितनी बड़ी रकम गायब की गई होगी।
धीरे-धीरे बढ़ रही रिकवरी
जानकारी के अनुसार, एसआईटी गठन से पहले ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संदिग्धों को पकड़कर पूछताछ की थी, जिसमें उनकी निशानदेही पर करीब 3 करोड़ रुपये बरामद होने की चर्चा थी।
हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी के दौरान करीब 70 लाख रुपये बरामद किए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होगी, रिकवरी का आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ेगा।











