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PM मोदी ने ‘X’ पर शेयर किए संस्कृत श्लोक, दिया सफलता का मंत्र

PM मोदी ने ‘X’ पर शेयर किए संस्कृत श्लोक: विनम्रता और दृढ़ संकल्प को बताया ‘विकसित भारत’ की कुंजी

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने की अपनी अनूठी पहल को जारी रखते हुए, शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर विनम्रता और क्षमाशीलता से जुड़ा एक बेहद प्रेरक संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा किया है।

पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि श्रेष्ठ आचरण ही व्यक्तित्व का सच्चा आभूषण है और इन्हीं गुणों के बल पर देशवासी ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के संकल्प को सिद्ध करने में जुटे हैं।

पिछले तीन दिनों से प्रधानमंत्री लगातार संस्कृत श्लोकों के माध्यम से राष्ट्रवाद, पराक्रम, और दृढ़ संकल्प का संदेश दे रहे हैं।

शुक्रवार का सुभाषित: विनम्रता और क्षमाशीलता का महत्व

प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा कि, “विनम्रता, क्षमाशीलता और उत्तम आचरण ही व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण हैं।”

उन्होंने भगवद्गीता से प्रेरित यह श्लोक साझा किया:

‘तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता। भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।’

हिंदी अर्थ: तेजस्विता, क्षमाशीलता, अदम्य धैर्य, आचरण की पवित्रता, राष्ट्र के प्रति निष्कपट भाव और अहंकाररहित व्यक्तित्व—ये सभी गुण दैवीय संपदा (ईश्वरीय गुणों) को प्राप्त व्यक्ति के लक्षण हैं।

गुरुवार का सुभाषित: वीर सावरकर को नमन और पराक्रम का संदेश

इससे पहले गुरुवार को, महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए पीएम मोदी ने पराक्रम और ज्ञान के अद्भुत संगम को दर्शाने वाला श्लोक साझा किया था।

‘अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले। शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः।।’

हिंदी अर्थ: इस विशाल संसार में अनेक लोग या तो केवल ज्ञान के लिए या केवल शक्ति (शस्त्र) के लिए प्रसिद्ध होते हैं। किंतु वास्तव में वे धीर और गंभीर व्यक्तित्व अत्यंत विरले होते हैं, जो शास्त्र (ज्ञान) और शस्त्र (पराक्रम) दोनों से ही युक्त हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सावरकर जी का ऐसा ही विराट व्यक्तित्व आज भी देश की पीढ़ियों को प्रेरित कर रहा है।

बुधवार का सुभाषित: निरंतर प्रयास और लक्ष्य प्राप्ति

बुधवार को राष्ट्र-निर्माण में दृढ़ संकल्प (Determination) की अहमियत बताते हुए पीएम मोदी ने लिखा था कि निरंतर प्रयास से बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

‘यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते।।’

हिंदी अर्थ: जो व्यक्ति जिस लक्ष्य की कामना करता है और उसे पाने के लिए बिना रुके, क्रमबद्ध तरीके से निरंतर प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से हासिल कर लेता है—बशर्ते वह बीच रास्ते में हार मानकर पीछे न हटे।

प्रधानमंत्री के इन सुभाषितों को सोशल मीडिया पर भारी समर्थन मिल रहा है। यह श्लोक न केवल भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को दर्शाते हैं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण के लिए युवाओं को एक स्पष्ट और सकारात्मक दिशा भी प्रदान कर रहे हैं।

Santosh SETH

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