Farmers inspecting dry agricultural land affected by irregular rainfall and El Nino impact in India

अल नीनो का प्रभाव: केंद्र ने घटाया 2026-27 का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य

अल नीनो का साया: मौसम की बेरुखी से 2026-27 का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य घटा, सूखे से निपटने के लिए केंद्र की नई रणनीति तैयार”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय कृषि क्षेत्र पर एक बार फिर ‘अल नीनो’ (El Nino) और मौसम की अनिश्चितता का गहरा साया मंडराने लगा है।

देश के कई हिस्सों में सामान्य से 12 प्रतिशत कम बारिश और सूखे जैसे हालात पैदा होने के बाद, केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए अपने कृषि उत्पादन लक्ष्यों का पुनर्निर्धारण किया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि जल स्तर और मिट्टी की नमी में आई कमी के वैज्ञानिक आकलनों के आधार पर अब कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दी जा रही है।

2026-27 के लिए नया खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य: 373.93 मिलियन टन

मानसून की स्थिति को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने चालू वर्ष (2026-27) के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन कर दिया है।

  • तुलनात्मक आंकड़े: यह नया लक्ष्य पिछले वर्ष (2025-26) के 376.56 मिलियन टन के वास्तविक उत्पादन से 2.63 मिलियन टन कम है। हालांकि, यह 2025-26 के शुरुआती 362 मिलियन टन के लक्ष्य से अधिक है।

  • सीजन के अनुसार लक्ष्य: नए निर्धारण के तहत खरीफ सीजन के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य 196.21 मिलियन टन और रबी फसल सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन तय किया गया है।

5 राज्यों में सूखे के हालात, केंद्रीय टीमों का दौरा

चालू खरीफ सीजन में देश भर में बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस बेरुखी का सबसे ज्यादा असर कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश सहित पांच राज्यों पर पड़ा है, जहां फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

इन राज्यों की मांग पर स्थिति का जायजा लेने और राहत उपायों पर काम करने के लिए केंद्र सरकार अपनी विशेष टीमें भेज रही है।

नई रणनीति: दलहन-तिलहन पर जोर और वैश्विक बाज़ारों की ओर रुख

संकट की इस घड़ी में सरकार ने कृषि रणनीति में दो बड़े बदलाव किए हैं:

  1. कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा: जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है, वहां किसानों को धान जैसी अधिक पानी सोखने वाली फसलों के बजाय दलहन (दालें) और तिलहन की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

  2. निर्यात और FTA का लाभ: घरेलू चुनौतियों से पार पाने के लिए सरकार किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का बड़ा अभियान शुरू कर रही है।

  3. किसानों को मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), शून्य आयात शुल्क वाले बाजारों और विदेशी मांग के अनुकूल गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी जाएगी ताकि वे अपने उत्पादों का बेहतर दाम पा सकें।