रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर मंगौड़ी सेंटर की आड़ में नशे का अवैध कारोबार; गांजा और नकदी बरामद, विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल।
रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर ‘मंगौड़ी सेंटर’ की आड़ में नशे का बड़ा खेल: जेल प्रहरी पर कैदियों को गांजा सप्लाई करने का आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल”
रायपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : कृष्णा सोनी की रिपोर्ट
राजधानी रायपुर की सबसे अति-सुरक्षित मानी जाने वाली सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जेल के ठीक बाहर संचालित एक ‘मंगौड़ी सेंटर’ में चल रहे बड़े नशा सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार के तार सीधे तौर पर जेल के प्रहरियों से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है।
जेल प्रशासन की टीम द्वारा की गई गुप्त दबिश में इस दुकान से भारी मात्रा में गांजा, नशीली गोलियां और नकदी बरामद की गई है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर मामले को दबाने की कोशिशों ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेल प्रशासन की टीम ने जब इस मंगौड़ी सेंटर पर छापा मारा तो वहां से चौंकाने वाली सामग्री बरामद हुई।
जब्ती का ब्योरा: मौके से गांजा, नशीली गोलियां, करीब 400 पैकेट ‘सितार’ गुटखा और तंबाकू बरामद किया गया।
इसके अलावा, अवैध लेनदेन के सुबूत के तौर पर दो मोबाइल फोन और लगभग 70 से 72 हजार रुपये की संदिग्ध नकदी भी जब्त की गई है।
इस पूरी इन्वेस्टिगेशन में जो सबसे हैरान करने वाला पहलू सामने आया है, वह है जेल प्रहरियों की संलिप्तता। सूत्रों का दावा है कि यह मंगौड़ी सेंटर जेल प्रहरी राजेश वर्मा का है।
सप्लाई चेन (Modus Operandi): इसी दुकान की आड़ में जेल के अंदर बंद कैदियों तक नशीले पदार्थों की सुरक्षित सप्लाई की जाती थी।
डिजिटल मनी ट्रेल: कैदियों को नशा मुहैया कराने के एवज में जो पैसा लिया जाता था, उसका ऑनलाइन भुगतान (UPI) कथित तौर पर प्रहरी राजेश वर्मा अपनी बेटी के बैंक खाते में प्राप्त करता था।
यह ‘मनी ट्रेल’ इस पूरे नेक्सस को बेनकाब करने के लिए एक अहम सुबूत माना जा रहा है।
इसके अलावा, मन्नत पुरैना नामक एक अन्य जेल प्रहरी के पास से भी 15 पैकेट तंबाकू बरामद किए जाने की खबर है।
इस बड़ी बरामदगी के बाद पिछले तीन दिनों से मंगौड़ी सेंटर बंद पड़ा है, लेकिन जेल प्रशासन की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है।
चर्चा है कि इतनी गंभीर आपराधिक गतिविधि पकड़े जाने के बावजूद, आरोपी प्रहरियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने या निलंबन जैसी बड़ी विभागीय कार्रवाई करने के बजाय, केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर मामले की लीपापोती की जा रही है।
अब तक जेल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि इस सिंडिकेट में कुछ और बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं।
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