Prime Minister Narendra Modi sharing an article on Samvidhan Hatya Diwas regarding the 1975 Emergency

PM मोदी ने आपातकाल पर गजेंद्र सिंह शेखावत का लेख किया साझा

‘संविधान हत्या दिवस’: PM मोदी ने आपातकाल पर साझा किया केंद्रीय मंत्री का लेख, याद दिलाया स्वतंत्रता हनन का वो काला दौर”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश के लोकतांत्रिक इतिहास में 1975 के आपातकाल (Emergency) को एक काले अध्याय के रूप में देखा जाता है।

इस दौर की कड़वी यादों और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को देशवासियों के सामने रखते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत का एक बेहद अहम लेख साझा किया है।

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार आपातकाल के दौरान देश के आम नागरिकों की स्वतंत्रता को कुचला गया और उनकी आकांक्षाओं पर गहरा प्रहार किया गया।

 

सोशल मीडिया ‘X’ पर PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर देशवासियों के साथ इस लेख को साझा करते हुए इसे पढ़ने की अपील की है।

“देश द्वारा #SamvidhanHatyaDiwas (संविधान हत्या दिवस) मनाने के अवसर पर, केंद्रीय मंत्री श्री @gssjodhpur ने आपातकाल और इससे लोगों की स्वतंत्रता और आकांक्षाएं किस तरह प्रभावित हुईं, इस पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।” – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

ऐतिहासिक जागरूकता बढ़ा रही सरकार की पहलें प्रधानमंत्री ने श्री शेखावत के लेख का हवाला देते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि वर्तमान सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलें देशवासियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और इतिहास के प्रति जागरूक कर रही हैं। लेख में विशेष रूप से सरकार के दो प्रमुख अभियानों का उल्लेख किया गया है:

  • सेवा पर्व (Seva Parv)
  • आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav)

संवैधानिक मूल्यों को मिल रही मजबूती प्रधानमंत्री ने कहा कि शेखावत का यह लेख इस बात को रेखांकित करता है कि ‘सेवा पर्व’ और ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ जैसी पहलें देश में संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने का काम कर रही हैं। इन पहलों के प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • ऐतिहासिक जागरूकता: नई पीढ़ी को देश के लोकतांत्रिक संघर्षों और आपातकाल जैसी घटनाओं के इतिहास से अवगत कराना।
  • सांस्कृतिक स्मृति का संरक्षण: देश की समृद्ध लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक यादों को संजोकर रखना।
  • राष्ट्रीय अस्मिता और जुड़ाव: नागरिकों के बीच राष्ट्रीय एकता, अस्मिता और राष्ट्र के प्रति जुड़ाव की भावना को और अधिक गहरा करना।

आपातकाल की बरसी के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह लेख न केवल उस दौर की ज्यादतियों की याद दिलाता है, बल्कि संविधान की रक्षा के लिए नागरिकों के निरंतर जागरूक रहने के महत्व को भी स्पष्ट करता है।