सिंधु घाटी सभ्यता के खंडहरों और सिंधु नदी के पानी के विवाद के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक साजिश को दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र।

सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान का नया ‘सांस्कृतिक’ पैंतरा

पाकिस्तान की नई साजिश और अंतरराष्ट्रीय टूलकिट: पानी के लिए अब भारत के प्राचीन इतिहास की चोरी, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चोट से बौखलाया पड़ोसी”

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पाकिस्तान के अंदर इन दिनों एक बेहद अजीब और खतरनाक कूटनीतिक खेल चल रहा है। दशकों से खुद को अरब, तुर्क और फारसियों का वंशज बताने वाला पाकिस्तान अचानक से अपने ‘भारतीय’ (Indic) और गैर-इस्लामिक इतिहास की ओर लौट रहा है।

पाकिस्तान अब संस्कृत भाषा, बसंत पंचमी, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और यहां तक कि चाणक्य व पाणिनी जैसे महान प्राचीन विद्वानों को अपनी विरासत बता कर खुद को असली भारत की तरह ‘रिब्रांड’ (Rebranding) करने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन इस अचानक उमड़े ‘सांस्कृतिक प्रेम’ के पीछे कोई हृदय परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश और नैरेटिव है।

सिंधु घाटी सभ्यता और तक्षशिला पर अचानक दावा क्यों?

दरअसल, पाकिस्तान ने हाल ही में दुनिया का ध्यान खींचने के लिए मोहनजोदड़ो (सिंधु घाटी सभ्यता – IVC) में नई खुदाई शुरू कर दी है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का ऐसा गठजोड़ देखने को मिला है जिसने नई दिल्ली के कान खड़े कर दिए हैं:

  • ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त का दौरा: पाकिस्तान में तैनात ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त टिमोथी केन (Timothy Kane) 19 जून 2026 को अचानक प्राचीन भारत के गांधार राज्य की राजधानी ‘तक्षशिला’ (Taxila) पहुंच गए और उसे पाकिस्तान के “असाधारण और समृद्ध इतिहास” का केंद्र बता दिया।

  • ब्रिटेन का फंड: इसके ठीक बाद, ब्रिटिश उच्चायोग ने भी पाकिस्तान के इस ‘ऐतिहासिक कल्चर’ को बचाने के लिए फंड देने का ऐलान कर दिया।

कूटनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि पश्चिमी देशों के इशारे पर पाकिस्तान को यह नैरेटिव गढ़ने में पूरी मदद मिल रही है।

असली खेल: सिंधु जल समझौता (IWT) और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चोट

राजनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की इस पूरी नौटंकी का एक ही मकसद है— सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को फिर से बहाल करवाना।

मई 2025 में हुए भीषण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान, भारत ने आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान पर इतिहास का सबसे बड़ा प्रहार करते हुए इस ऐतिहासिक संधि को पूरी तरह से निलंबित (Suspend) कर दिया था।

इस एक कड़े फैसले ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ कर रख दी है और वहां कृषि व बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ है।

अब पश्चिमी देशों से पैसा लेकर पाकिस्तान यह नया नैरेटिव चला रहा है कि जब “सिंधु घाटी सभ्यता” पाकिस्तान की विरासत है, तो भारत “सिंधु नदी” का पानी कैसे रोक सकता है?

क्या है हकीकत?

यह एक स्पष्ट भौगोलिक सत्य है कि हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और तक्षशिला जैसे प्राचीन और महान ऐतिहासिक स्थल आज के वर्तमान पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर आते हैं।

बंटवारे के बाद ये इलाके पाकिस्तान के हिस्से में चले गए थे, इस नाते से यह उस जमीन का क्षेत्रीय इतिहास जरूर है।

लेकिन, 1947 में अपने जन्म के बाद से जिस पाकिस्तान ने हमेशा इस गैर-इस्लामिक इतिहास को नकारा और उसे मिटाने की कोशिश की, उसका अचानक 2026 में इसके लिए जागना केवल भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की एक हताश कोशिश है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से भारत का रुख बिल्कुल साफ है: जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होता, पानी पर किसी भी तरह का कोई कूटनीतिक समझौता नहीं होगा।

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