नापाक साजिश: 25 करोड़ से फिर खड़ा हुआ जैश का मुख्यालय!
भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तबाह जैश मुख्यालय फिर खड़ा: पाकिस्तान ने दी 25 करोड़ की फंडिंग, तुर्किये से मंगाए घातक ड्रोन”
इस्लामाबाद/नई दिल्ली : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार : THE POLITICS AGAIN
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत तबाह किए गए आतंकी ठिकानों को लेकर एक चौंकाने वाली खुफिया रिपोर्ट सामने आई है।
भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपने अदम्य पराक्रम से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्य मुख्यालय ‘मरकज सुभानल्लाह’ को मिट्टी में मिला दिया था।
लेकिन अब खुफिया सैटेलाइट फुटेज और इनपुट्स से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान सरकार की शह और करोड़ों रुपये की फंडिंग से यह आतंकी अड्डा एक बार फिर से पूरी तरह खड़ा हो चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर के निशान मिटाकर किया गया नवनिर्माण
वायुसेना के धुरंधरों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश मुख्यालय के मुख्य हॉल और गुंबद पर घातक बम गिराया था, जिससे इमारत के बीचों-बीच एक विशाल और गहरा गड्ढा हो गया था।
खुफिया जानकारियों के मुताबिक, तबाही के उन निशानों को छिपाने के लिए बड़े पैमाने पर मरम्मत की गई है:
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गहरे गड्ढे को कंक्रीट से भर दिया गया है और नई मार्बल फ्लोरिंग की गई है।
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क्षतिग्रस्त गुंबदों, अंदर की दीवारों के प्लास्टर और अल-साबिर मदरसे को नए सिरे से तैयार किया गया है।
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आतंकी सरगनाओं के ध्वस्त हो चुके घरों का भी पुनर्निर्माण किया गया है।
25 करोड़ की सरकारी फंडिंग और नए आकाओं के हाथ कमान
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस परिसर को फिर से खड़ा करने के लिए जैश को 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की आर्थिक मदद दी है। इसमें से 11 करोड़ रुपये केवल पिछले 15 महीनों में खर्च किए गए हैं।
जैश प्रमुख मसूद अजहर इस वक्त गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है और पूरी तरह अस्वस्थ है।
ऐसे में बहावलपुर स्थित इस नए मुख्यालय की कमान उसके भाइयों तल्हा अल-सैफ और मोइनुद्दीन औरंगजेब ने संभाल ली है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, मसूद अजहर और रऊफ असगर जैसे खूंखार आतंकी सरगना इस समय सिंध प्रांत के नवाबशाह जिले में पाकिस्तान सरकार की कड़ी सुरक्षा और संरक्षण में छिपे हुए हैं।
तुर्किये से रक्षा समझौते की आड़ में ड्रोन की तस्करी
इतना ही नहीं, पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के साथ हुए रक्षा समझौतों की आड़ में हथियारों का जखीरा भी इकट्ठा कर रहा है।
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60 घंटे का सीक्रेट ऑपरेशन: 19 से 21 अगस्त के बीच लगभग 60 घंटे में तुर्किये के सी-130 और ए-400-एम जंबो मिलिट्री विमानों ने पाकिस्तानी एयरबेस पर कई उड़ानें भरीं।
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रात के अंधेरे में लैंडिंग: सैटेलाइट ट्रैकिंग से बचने के लिए तुर्किये ने रात के अंधेरे में पाकिस्तान को घातक ड्रोन की बड़ी खेप पहुंचाई है। इन ड्रोन्स को बहावलपुर और रावलपिंडी के सुरक्षित ठिकानों पर रखा गया है।
पाकिस्तान की ये गतिविधियां स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि वह सीमा पार आतंकवाद को फिर से हवा देने की गहरी साजिश रच रहा है।











