समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओपी राजभर का प्रतीकात्मक चित्र।

ओपी राजभर का अखिलेश को ‘बर्थडे गिफ्ट’: AC छोड़ें, गांव की पगडंडियां नापें

अखिलेश के ‘बर्थडे’ पर ओपी राजभर का करारा तंज: “उपहार में दे रहा हूं बेशकीमती सलाह, आलस और AC की राजनीति छोड़कर गांव की पगडंडियां नापें”

लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें देश और प्रदेश भर से बधाइयां मिल रही हैं।

लेकिन, उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और यूपी के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की उस बधाई संदेश की हो रही है, जिसमें उन्होंने अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ-साथ एक ‘बेशकीमती सलाह’ के रूप में करारा सियासी तंज कसा है।

‘बड़े घर के बेटे को मैं क्या उपहार दे सकता हूं?’

अपने बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले ओपी राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव को उनकी आरामतलबी और ‘एसी (AC)’ की राजनीति को लेकर घेरा।

राजभर ने लिखा: “अखिलेश यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं। बहुत सोचा कि आपको उपहार में क्या दूं। आप ठहरे बड़े घर के बेटे, पिताजी पूर्व सीएम और रक्षामंत्री रहे, आप खुद पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। आलीशान बंगलों में जीवन गुजरा है। हम भला क्या दे सकते हैं आपको? मगर उम्र और अनुभव में बड़ा होने के नाते एक बेशकीमती सलाह हम आपको दे सकते हैं। इस सलाह को ही जन्मदिन पर मेरी तरफ से उपहार मानिएगा।”

‘AC और PC की राजनीति का त्याग करें’

राजभर ने अखिलेश यादव को जमीनी हकीकत से रूबरू होने की नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी आलसी और आरामतलबी वाली जिंदगी से बाहर निकलना चाहिए।

उन्होंने लिखा: “सलाह यही है कि AC (एयर कंडीशनर) और PC (प्रेस कॉन्फ्रेंस/कम्प्यूटर) वाली राजनीति का जितना जल्दी हो सके त्याग करेंगे, उतना आपके लिए अच्छा रहेगा। आलस से बाहर निकलकर गांव-देहात की पगडंडियां भी नापिए। खाली एसी में बैठकर ट्विटर पर खेत-किसान का वीडियो मत देखिए, बल्कि खेत में जाकर खुद किसानी समझिए।”

राजभर ने उन्हें गैर-यादव पिछड़ों, दलितों, वंचितों और गरीबों के सुख-दुख में शामिल होने की सलाह दी।

‘शुरू में पैर मुचकेगा, कांटा भी धंसेगा’

तंज को और पैना करते हुए राजभर ने आगे लिखा कि, “हां, ये हो सकता है कि शुरू-शुरू में मेड़-पगडंडी पर चलते-चलते आपका पैर मुचुक जाए, कांटा धंस जाए। ऊपर से घाम (धूप) भी लगेगा और पसीना से तर भी हो जाएंगे, लेकिन लगातार कोशिश करते रहेंगे तो एक न एक दिन गांव की राजनीति से प्रदेश की राजनीति का असली रास्ता भी समझ में आ ही जाएगा।”

‘जमीन से जुड़ने का कोई शॉर्टकट नहीं होता अखिलेश बाबू’

अपने पोस्ट के अंत में राजभर ने खुद की मेहनत का उदाहरण देते हुए अखिलेश को नसीहत दी कि जमीन से जुड़ने का कोई ‘शॉर्टकट’ नहीं होता। इसके लिए मेड़ पर पैर रगड़ना ही पड़ता है।

उन्होंने कहा, “हम ही से सीख लीजिए, 48 डिग्री में भी गांव-गांव घूमता हूं। बस इतना ही कहना था, आपके लिए यही उचित उपहार है हमारी तरफ से।”

ओपी राजभर का यह ‘बर्थडे गिफ्ट’ यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह है कि समाजवादी पार्टी या खुद अखिलेश यादव की तरफ से इस सियासी तंज का क्या जवाब आता है।