National Security Advisor Ajit Doval and Home Minister Amit Shah conducting secret high-level security meetings in Parliament ahead of August 5 regarding internal security threats.
5 अगस्त से पहले दिल्ली में बड़ी रणनीतिक हलचल: NSA डोभाल और गृह मंत्रालय के सीक्रेट एक्शन से मची खलबली”
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन :श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
5 अगस्त की तारीख से पहले देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षा और रणनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है।
दिल्ली में लगातार उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी है। खुफिया एजेंसियों के अलर्ट और बैठकों की रफ्तार इस बात का साफ इशारा कर रही है कि सरकार किसी बड़े नीतिगत कदम या फिर किसी बड़ी सुरक्षा चुनौती को नाकाम करने की तैयारी में है।
संसद भवन में जब विपक्ष एंटी-पेपर लीक बिल और नीट (NEET) विवाद को लेकर वेल में हंगामा कर रहा था, ठीक उसी वक्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल खामोशी से संसद भवन में दाखिल हुए।
बाहर से यह सामान्य दौरा लग रहा था, लेकिन इसके तार गृह मंत्री अमित शाह के कमरे में चल रही एक बेहद सीक्रेट मीटिंग से जुड़े थे।
जंतर-मंतर पर हालिया विरोध प्रदर्शनों में भड़की हिंसा के बाद अमित शाह ने 40 मिनट की मैराथन बैठक की, जिसमें आईबी (IB) चीफ, केंद्रीय गृह सचिव और पैरामिलिट्री फोर्सेज के डीजी मौजूद थे।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री समेत कई बड़े मंत्रियों के साथ भी अहम चर्चाएं हुई हैं।
दिल्ली में हाल ही में पुलिस कमिश्नर बदले गए और इतिहास में पहली बार एक आईबी (Intelligence Bureau) अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
दिल्ली हमेशा से आतंकवाद और साजिशों के निशाने पर रही है, इसलिए खुफिया बैकअप वाले चीफ की नियुक्ति को इस बड़े रणनीतिक प्लान का हिस्सा माना जा रहा है।
अब शिक्षा प्रणाली में सेंधमारी सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा बन गई है।
नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों के उग्र प्रदर्शन से देश का माहौल गरमाया हुआ है।
विदेशी ताकतें और उनके लोकल एजेंट पेपर लीक के जरिए युवाओं में असंतोष फैलाकर उन्हें सड़कों पर उतारने की साजिश रच रहे हैं ताकि देश में अस्थिरता फैलाई जा सके।
युवाओं को भड़काने की इस टूलकिट साजिश को रोकने के लिए ही ‘एंटी पेपर लीक बिल’ को एक ब्रह्मास्त्र के रूप में लाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति जलाना और कानून तोड़ना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस सख्ती के बाद युवाओं को भड़काने वाले नेता अब गायब हो चुके हैं, जबकि गुमराह युवा पुलिस थानों के चक्कर काट रहे हैं।
असली स्ट्राइक उन मास्टरमाइंड्स पर हो रही है जो एसी कमरों में बैठकर हिंसा की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (IFSO) ने Facebook, X, YouTube और Instagram जैसी ग्लोबल सोशल मीडिया कंपनियों को कड़ा अल्टीमेटम भेजा है।
खुफिया इनपुट के अनुसार, जंतर-मंतर हिंसा और भ्रामक वीडियो फैलाने के पीछे एक बड़ा इंटरनेशनल मनी ट्रेल और करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग काम कर रही है।
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