NSA अजीत डोभाल का युवाओं को मंत्र: ‘पीएम मोदी ने देश को ऑटोपायलट मोड पर डाला, अब विकसित भारत बनना तय’

“राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शनिवार को ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ (VBYLD) के ब्यूरो रिपोर्ट: द पॉलिटिक्स अगेन (The Politics Again) स्थान: नई दिल्ली | तारीख: 10 जनवरी, 2026उद्घाटन समारोह में देश के भविष्य यानी युवाओं के साथ सीधा संवाद किया”

ब्यूरो रिपोर्ट: द पॉलिटिक्स अगेन (The Politics Again) स्थान: नई दिल्ली | तारीख: 10 जनवरी, 2026

अपने संबोधन में डोभाल ने न केवल भारत के गौरवशाली इतिहास का जिक्र किया, बल्कि आधुनिक भारत की शक्ति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर भी बेबाक राय रखी।

ऑटोपायलट पर है विकसित भारत का सफर

डोभाल ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने वह आधार तैयार कर लिया है, जहां से पीछे मुड़ना नामुमकिन है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी इस देश को ऐसे मुकाम पर ले गए हैं कि अगर यह आज ऑटोपायलट पर भी चलता रहे, तो भी भारत का विकसित राष्ट्र बनना निश्चित है।”

शक्तिशाली रहेंगे तभी आजाद रहेंगे

दुनिया भर में चल रहे युद्धों और संघर्षों का उदाहरण देते हुए एनएसए ने दो टूक शब्दों में ‘शक्ति’ का महत्व समझाया। उन्होंने कहा:

  • स्वतंत्रता और शक्ति: दुनिया में संघर्ष इसलिए है क्योंकि ताकतवर देश दूसरों पर अपनी इच्छा थोपना चाहते हैं। अगर आप शक्तिशाली हैं, तभी आप स्वतंत्र रह पाएंगे।

  • आत्मविश्वास: बिना आत्मविश्वास के सारी शक्ति और हथियार बेकार हैं।

  • नेतृत्व का महत्व: उन्होंने नेपोलियन का जिक्र करते हुए कहा कि एक शेर के नेतृत्व में 1000 भेड़ों की सेना ज्यादा खतरनाक होती है। आज भारत के पास वैसा ही ‘शेर’ जैसा नेतृत्व है।

इतिहास का बदला: विनाश नहीं, पुनर्निर्माण

डोभाल ने युवाओं को इतिहास की उन कड़वी यादों से भी रूबरू कराया जब भारत की सभ्यता को कुचला गया और मंदिरों को नष्ट किया गया। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही— “बदला”। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें खून-खराबे वाला बदला नहीं लेना है।

“हमें अपने मूल्यों पर आधारित एक महान भारत का पुनर्निर्माण करके अपने अतीत के अपमान का बदला लेना होगा। यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।”

अर्थव्यवस्था का इतिहास और भारत का दबदबा

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की पुस्तक ‘विश्व अर्थव्यवस्था का इतिहास’ का हवाला देते हुए डोभाल ने बताया कि पहली से 17वीं शताब्दी तक भारत और चीन विश्व अर्थव्यवस्था का 55-60% हिस्सा हुआ करते थे।

उन्होंने कहा कि भारत पहले भी शिखर पर था, लेकिन पतन इसलिए हुआ क्योंकि राष्ट्रवाद और राष्ट्र को मजबूत रखने का संघर्ष धीमा पड़ गया था। यह संघर्ष निरंतर चलना चाहिए।

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