Himachal Pradesh CM Sukhvinder Singh Sukhu speaking at the 11th NITI Aayog Governing Council meeting in New Delhi

नीति आयोग बैठक: CM सुक्खू ने केंद्र से मांगे 50,000 करोड़

🏔️ नीति आयोग की बैठक में CM सुक्खू की दो टूक: ‘हिमाचल को चाहिए 50 हजार करोड़’, गिनाईं राज्य की वित्तीय चुनौतियां”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की वित्तीय चुनौतियों और अधिकारों का मुद्दा पूरी मजबूती के साथ उठाया।

‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर आयोजित इस उच्च-स्तरीय बैठक में सीएम सुक्खू ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए एक विशेष उच्च-स्तरीय समिति गठित करने की मांग की।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं मुख्यमंत्री सुक्खू ने नीति आयोग के मंच से क्या प्रमुख मांगें और उपलब्धियां रखीं:

💰 वित्तीय संकट: ‘भरपाई के लिए 25 हजार नहीं, 50 हजार करोड़ चाहिए’

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की प्रगति में हिमाचल प्रदेश एक अहम योगदान दे रहा है, लेकिन वर्तमान में राज्य भारी आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा है। उन्होंने निम्नलिखित वित्तीय चिंताएं मंच पर रखीं:

  • राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति: अनुदान खत्म होने से राज्य की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

  • सीएम ने कहा कि केंद्र द्वारा दिए गए 25,000 करोड़ रुपये नाकाफी हैं; विकास कार्यों को जारी रखने के लिए इसे बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए।

  • जीएसटी (GST) का नुकसान: वर्तमान जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले 8 वर्षों में राज्य को करीब 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ा है।

  • आपदा राहत का इंतजार: प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान के बावजूद, केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता का राज्य को अभी भी इंतजार है।

ऊर्जा और पारिस्थितिकी: ‘मुफ्त बिजली और बकाया राशि हमारा हक’

हिमाचल प्रदेश को देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ बताते हुए सीएम सुक्खू ने ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के एवज में राज्य के अधिकार मांगे:

  • 90 हजार करोड़ की पारिस्थितिकीय सेवाएं: भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि हिमाचल प्रतिवर्ष 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिकीय सेवाएं देता है, लेकिन इसके बदले उसे कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती।

  • BBMB का 7 हजार करोड़ बकाया: 13,000 मेगावाट बिजली उत्पादन के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है।

  • इसके अलावा, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से लगभग 7,000 करोड़ रुपये का बकाया अभी भी अटका है।

📈 मानव विकास और शिक्षा में हिमाचल के कीर्तिमान

बैठक में सीएम सुक्खू ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी ब्यौरा दिया:

  • शिक्षा में लंबी छलांग: वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर घोषित हुए हिमाचल प्रदेश ने वर्ष 2026 के ‘स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक’ में छठा स्थान हासिल किया है (2022 में यह 21वें स्थान पर था)।

  • उच्च शिक्षा में रिकॉर्ड: उच्च शिक्षा में प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.4% ज्यादा है।

  • नई योजना: राज्य के 1.5 लाख गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना शुरू की गई है।

✈️ पर्यटन विस्तार और नशे के खिलाफ ‘वॉर’

पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री ने गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार पर जोर दिया, ताकि राज्य को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ बनाया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का जिक्र किया और खुफिया तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र से सहयोग की अपील की।

सीएम सुक्खू ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने और हरित ऊर्जा (Green Hydrogen, Solar Energy) के क्षेत्र में हिमाचल को देश का अग्रणी राज्य बनाने का विजन भी नीति आयोग के समक्ष रखा।

नोट: देशभर की राजनीति, नीतिगत फैसलों और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।