NEET बवाल: PM क्यों नहीं ले रहे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा? इनसाइड स्टोरी
NEET बवाल: भारी जनाक्रोश के बावजूद PM मोदी ने क्यों नहीं लिया धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा? समझें इनसाइड स्टोरी और मास्टरस्ट्रोक”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले ने पूरे देश में भूचाल ला दिया है। जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक चला सोनम वांगचुक का ऐतिहासिक अनशन,
सड़कों पर हजारों छात्रों का ‘संसद मार्च’ और विपक्ष का तीखा हमला… पूरे देश में सिर्फ एक ही मांग गूंज रही है— “शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो।”
लेकिन इतना भारी जन आक्रोश, चौतरफा राजनीतिक दबाव और इतने बड़े घोटाले के बावजूद मोदी सरकार ने अपने शिक्षा मंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं लिया?
क्या यह सरकार की मजबूरी है या फिर इसके पीछे पीएम मोदी का कोई ‘मास्टरस्ट्रोक’ छिपा है? आइए समझते हैं इस पूरी राजनीतिक रणनीति की इनसाइड स्टोरी।
वजह नंबर 1: गलती स्वीकार करने का डर और ‘द मोदी वे’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सबसे बड़ी वजह है ‘गलती स्वीकार करने का डर’। अगर सरकार आज धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लेती है,
तो विपक्ष और जनता के बीच सीधा संदेश जाएगा कि सरकार ने नीट पेपर लीक में अपनी पूरी नाकामी को स्वीकार कर लिया है।
पीएम मोदी की काम करने की कार्यशैली (‘द मोदी वे ऑफ पॉलिटिक्स’) को देखें तो वे कभी भी सार्वजनिक रूप से यह संदेश नहीं देना चाहते
कि सरकार किसी के आगे ‘बैकफुट’ पर है या झुक गई है। मजबूत नेतृत्व की छवि बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है।
इसीलिए इस्तीफे की जगह सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट का दांव खेलकर नैरेटिव को घुमाने की रणनीति अपनाई है।
वजह नंबर 2: विपक्ष को ‘हथियार’ मिलने का खतरा
दूसरी बड़ी वजह ‘भविष्य का खतरा’ है। साल 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुलेआम कहा था कि “एनडीए सरकार में केवल आरोपों के आधार पर मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते।”
मोदी सरकार ने पिछली सरकारों (UPA) की उस परंपरा को पूरी तरह बदल दिया है जहां आरोप लगते ही मंत्री को हटा दिया जाता था।
सरकार के रणनीतिकारों को पता है कि अगर इस बार दबाव में आकर इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, तो यह विपक्ष के लिए एक बहुत बड़ा हथियार बन जाएगा।
आने वाले दिनों में हर छोटे-बड़े विवाद पर विपक्ष मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद ठप कर देगा।
वजह नंबर 3: धर्मेंद्र प्रधान की संघ (RSS) में गहरी पैठ और 12 साल का रिकॉर्ड
धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ एक मंत्री नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक बेहद प्रभावशाली राष्ट्रीय नेता हैं। उड़ीसा के संभलपुर से सांसद प्रधान पीएम मोदी के ‘मिस्टर डिपेंडेबल’ माने जाते हैं।
प्रधान का ट्रैक रिकॉर्ड:
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स्मृति ईरानी: 2 साल 36 दिन
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प्रकाश जावड़ेकर: 2 साल 329 दिन
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रमेश पोखरियाल: 2 साल 38 दिन
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धर्मेंद्र प्रधान: 5 साल से अधिक (7 जुलाई 2021 से लगातार शिक्षा मंत्री)
वे पिछले 12 वर्षों से बिना किसी ब्रेक के लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं। इसके अलावा, धर्मेंद्र प्रधान ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020’ को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाई है।
प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय भाषा के प्रयोग को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रमुख वैचारिक स्तंभ माना जाता है।
प्रधान ने संघ से जुड़े शैक्षिक संगठन ‘विद्या भारती’ के अनुभवों को NEP 2020 में लागू किया है, जिससे उनकी संघ में काफी अच्छी पैठ है। ऐसे कद्दावर नेता को हटाना सरकार के लिए आसान नहीं है।
गठबंधन सरकार की मजबूरी भी है एक कारण
हालांकि, ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने कभी फैसले नहीं बदले। 2018 में एमजे अकबर का इस्तीफा और 2021 में तीनों कृषि कानूनों की वापसी इसके बड़े उदाहरण हैं।
लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं। सरकार अब पूर्ण बहुमत में नहीं बल्कि ‘एनडीए (NDA) के सहयोगियों’ के साथ सत्ता में है।
इसलिए सरकार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है, ताकि गठबंधन के भीतर या पार्टी में कोई गलत संदेश न जाए।
यही कारण है कि छात्रों के भारी गुस्से के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही है।











