परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे अहम बिल पास कराने के लिए एनडीए अपने कुनबे का विस्तार करने जा रहा है। जल्द ही द्रमुक (DMK) और शरद पवार की एनसीपी को केंद्र में मंत्री पद देकर एनडीए में शामिल किया जा सकता है।
विपक्ष को बड़ा झटका: NDA में शामिल होंगे DMK और शरद पवार की NCP, दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचेगी मोदी सरकार!
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। विपक्षी खेमे (I.N.D.I.A ब्लॉक) को तगड़ा झटका देते हुए एनडीए (NDA) का कुनबा जल्द ही बड़ा होने वाला है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु से सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) और महाराष्ट्र से शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (NCP-SP) के एनडीए में शामिल होने पर लगभग सहमति बन गई है।
इसे लेकर अंतिम दौर की वार्ता जारी है। इसके साथ ही पंजाब से शिरोमणि अकाली दल (SAD) को भी वापस गठबंधन में लाने का रास्ता तलाशा जा रहा है।
भाजपा की इस बड़ी सियासी कवायद के पीछे की मुख्य वजह भविष्य की रणनीतियां हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार परिसीमन (Delimitation) से जुड़े संविधान संशोधन को दोबारा आगे बढ़ाने और महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने की तैयारी में है।
इन बड़े संविधान संशोधनों के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे साधने के लिए नए सहयोगियों को जोड़ा जा रहा है।
एनडीए में नए दलों की एंट्री के साथ ही मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होना भी तय माना जा रहा है।
द्रमुक की मांग: संसद के दोनों सदनों में कुल 30 सांसदों वाली द्रमुक (DMK) केंद्र में कम से कम 2 मंत्री पद चाहती है।
एनसीपी की दावेदारी: शरद पवार की एनसीपी की ओर से सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की प्रबल संभावना है। माना जा रहा है कि इसी माह के अंत तक मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है।
अगर द्रमुक और एनसीपी आधिकारिक रूप से एनडीए का हिस्सा बनते हैं, तो संसद में सरकार की ताकत काफी बढ़ जाएगी:
लोकसभा का गणित: वर्तमान में लोकसभा में सरकार और सहयोगी दलों (NDA) के पास 325 सांसद हैं।
डीएमके के 22 और एनसीपी के 8 सांसदों के जुड़ने से यह आंकड़ा 355 तक पहुंच जाएगा। सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों की जरूरत होती है। ऐसे में सरकार जादुई आंकड़े से सिर्फ 5 कदम दूर रह जाएगी।
राज्यसभा का गणित: राज्यसभा में निर्दलीय और मनोनीत सदस्यों को मिलाकर एनडीए के पास 154 सांसद हैं। द्रमुक के 8 और एनसीपी के 1 सांसद के आने से यह संख्या 163 हो जाएगी।
उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों की जरूरत है, यानी सरकार बहुमत से सिर्फ 1 आंकड़ा दूर होगी।
विपक्षी गठबंधन में दरार और इन नए समीकरणों की नींव हाल ही के राजनीतिक घटनाक्रमों से पड़ी है:
तमिलनाडु में दरार: मई में 5 राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने तमिलनाडु में चुनाव पूर्व गठबंधन तोड़ दिया और वह टीवीके (TVK) के साथ चली गई। यहीं से द्रमुक और कांग्रेस के बीच अलगाव शुरू हुआ।
चाय पार्टी में संदेश: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी का कांग्रेस ने बहिष्कार किया था, लेकिन द्रमुक नेता कनिमोझी इसमें शामिल हुईं, जो बदले हुए समीकरणों का स्पष्ट संकेत था।
परिसीमन पर रुख: हाल ही में परिसीमन पर टीवीके की बैठक में द्रमुक के सांसद शामिल नहीं हुए। वहीं दूसरी ओर, शरद पवार की बेटी और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने बयान दिया था कि यदि सीटें 50% बढ़ाई जाती हैं, तो उनकी पार्टी परिसीमन का समर्थन कर सकती है।
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