हालिया चुनावों और इस्तीफों के बाद राज्यसभा में एनडीए (NDA) दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े (164) के बेहद करीब पहुंच गया है।
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब NDA: क्या है मोदी सरकार का ‘मिशन 164’ और कैसे पूरा होगा जादुई आंकड़ा?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
हाल ही में संपन्न हुए 27 राज्यसभा सीटों के चुनाव के बाद उच्च सदन (Rajya Sabha) का पूरा गणित अब काफी हद तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है।
झारखंड के राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी की शानदार जीत के बाद राज्यसभा में NDA सांसदों का आंकड़ा 153 तक पहुंच गया है।
मोदी सरकार के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि महत्वपूर्ण ‘संविधान संशोधन’ बिल पास कराने के लिए उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत की दरकार होती है, और एनडीए अब इस लक्ष्य के बेहद करीब है।
उच्च सदन में जल्द ही NDA की सदस्य संख्या 157 तक पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण पश्चिम बंगाल है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 4 राज्यसभा सांसदों— सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और कोयल मलिक— के इस्तीफे से 4 सीटें खाली हो गई हैं।
वर्तमान विधानसभा आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में होने वाले इन उपचुनावों में पलड़ा BJP के पक्ष में रहने की उम्मीद है।
यदि NDA ये चारों सीटें जीत लेता है, तो वह दो-तिहाई बहुमत (164) से महज 7 सीट पीछे रह जाएगा।
वर्तमान में 153 सांसदों के समर्थन के साथ NDA राज्यसभा में सबसे मजबूत स्थिति में है। इसमें BJP के 115 सांसद, TDP के 4, JDU के 4, AIADMK के 4, NCP के 4, 7 मनोनीत और अन्य छोटे दलों व निर्दलियों का समर्थन शामिल है।
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के पास अभी 63 सांसद हैं, जिनमें कांग्रेस के सर्वाधिक 30 और TMC के 9 सांसद शामिल हैं। वहीं, 26 सांसद ऐसे हैं जो न तो NDA का हिस्सा हैं और न ही INDIA अलायंस का (जैसे BJD, YSRCP, BRS आदि)।
संविधान संशोधन के लिए NDA को 164 सांसदों के वोट चाहिए।
YSRCP का साथ: हाल ही में परिसीमन विधेयक पर NDA को जगन मोहन रेड्डी की YSRCP का समर्थन मिला था। यदि आगे भी YSRCP के 4 सांसद NDA का साथ देते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 161 (157+4) तक पहुंच जाएगा।
अंतिम 3 वोटों का जुगाड़: 161 तक पहुंचने के बाद NDA को केवल 3 और वोटों की आवश्यकता होगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ऐसे में अगर BJP अन्य विपक्षी या निर्दलीय सांसदों को साध लेती है, या फिर बिल पर वोटिंग के दौरान विपक्ष के कुछ सांसद ‘वॉकआउट’ कर देते हैं (जिससे सदन की कुल संख्या घट जाएगी), तो मोदी सरकार आसानी से संविधान संशोधन बिल पास करा सकती है।
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