पूर्वांचल / वाराणसी

वाराणसी: पंखा फैक्ट्री में भीषण आग, अस्पताल में भरा धुआं, मची अफरातफरी

वाराणसी के मुढ़ैला में पंखा फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड: जहरीले धुएं से मेघना अस्पताल में मची अफरातफरी, मरीजों की अटकीं सांसें; करोड़ों का नुकसान”

वाराणसी: द पॉलिटिक्स अगेन : दीपू हिन्दू की रिपोर्ट 

जिले के मुढ़ैला तिराहे (चांदपुर-रोहनिया मार्ग) पर स्थित एक पंखा फैक्ट्री के बड़े गोदाम में भीषण आग लग गई। सुबह 4 बजे से भड़की इस आग ने चंद घंटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया।

आसमान में उठे काले और जहरीले धुएं के गुबार ने न केवल आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, बल्कि पड़ोस में स्थित मेघना अस्पताल के मरीजों की सांसों पर भी भारी संकट खड़ा कर दिया।

दमकल विभाग की 8 गाड़ियों और 50 जवानों ने करीब डेढ़ लाख लीटर पानी की बौछार कर भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

अस्पताल के वार्डों में भरा धुआं, मरीजों को किया गया शिफ्ट

आग की लपटों से ज्यादा खतरनाक उसमें से निकल रहा रासायनिक धुआं साबित हुआ। फैक्ट्री में भारी मात्रा में रखे प्लास्टिक के ब्लेड, कॉपर वायर और पैकेजिंग गत्तों के जलने से निकला जहरीला धुआं सीधे मेघना अस्पताल के प्राइवेट कमरों और जनरल वार्ड में भर गया।

धुएं के कारण मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और अस्पताल में अफरातफरी मच गई।

हालात बिगड़ते देख तीमारदारों और अस्पताल प्रशासन ने तुरंत तीसरी और दूसरी मंजिल पर भर्ती मरीजों को ग्राउंड फ्लोर और सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया।

एहतियातन अस्पताल की खिड़कियों को सील कर एग्जॉस्ट फैन चलाए गए और पुलिस ने अस्पताल का दूसरा गेट बंद करा दिया।

बारूद साबित हुआ प्लास्टिक और गत्तों का स्टॉक, इमारत झुकी

यह इमारत केवल फैक्ट्री नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर स्टॉक रखने का गोदाम भी थी। अग्निशमन अधिकारी विनोद पांडेय और सीएफओ आनंद सिंह राजपूत के मुताबिक, अंदर क्षमता से अधिक प्लास्टिक के पार्ट्स, थर्माकोल और सैकड़ों गत्ते ठसाठस भरे थे।

आग लगने पर वेंटिलेशन (हवा की निकासी) न होने के कारण अंदर अत्यधिक ऊष्मा बन गई, जिससे ये सामान बारूद की तरह सुलग उठे।

गर्मी इतनी प्रचंड थी कि दो मंजिला इमारत के पिलर (स्तंभ) आगे की ओर झुक गए, जिससे भवन की संरचनात्मक सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

रास्ता संकरा होने से रेस्क्यू में आई परेशानी, 50 मीटर का दायरा कराया गया खाली

फैक्ट्री तक जाने वाला रास्ता बेहद संकरा होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सीधे गेट तक नहीं पहुंच सकीं। मजबूरन मुख्य सड़क से ही पाइप के जरिये पानी और केमिकल फोम की बौछार करनी पड़ी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंडुवाडीह थाना प्रभारी दिगंबर उपाध्याय ने चांदपुर-रोहनिया मार्ग को खाली कराया और फैक्ट्री के 50 मीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अलसुबह घरों से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

शॉर्ट सर्किट या लापरवाही? जांच के लिए कमेटी गठित

फायर एनओसी होने के बावजूद जिस तरह से आग ने विकराल रूप लिया, उसने व्यावसायिक इमारतों के सुरक्षा ऑडिट की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फैक्ट्री प्रबंधक अनादिशंकर गुप्ता के अनुसार, इस अग्निकांड में कई करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

फिलहाल मंडुवाडीह पुलिस, फायर ब्रिगेड और फॉरेंसिक टीम आग लगने के सटीक कारणों (शॉर्ट सर्किट या अन्य लापरवाही) की जांच में जुटी है।

Santosh SETH

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