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मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता बाबा सिद्दीकी की गोलीबारी में मृत्यु

“पूर्व राज्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता बाबा सिद्दीकी की गोलीबारी में मृत्यु हो गई। उन पर तीन अज्ञात व्यक्तियों ने गोलीबारी की”

 

MUMBAI 13/10/2024 REPORTING BY – संतोष सेठ 

मुंबई में राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी की कार पर दागी गईं गोलियों का दहला देने वाला दृश्य सामने आया है। तीन हमलावरों ने मुंबई के निर्मल नगर में कोलगेट ग्राउंड के पास बाबा सिद्दीकी की कार को निशाना बनाया था।

राकांपा नेता की कार पर हमलावरों ने सामने से और साइड से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं थीं। तीन गोलियां लगने के बाद सिद्दीकी गंभीर घायल हुए थे, जिन्हें नाजुक हालत में लीलावती अस्पताल पहुंचाया गया, जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मुंबई पुलिस के मुताबिक, बाबा सिद्दीकी पर हमला करने वाले तीन संदिग्धों में से दो को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से एक उत्तर प्रदेश और दूसरा हरियाणा का रहने वाला है।

जबकि, आरोपियों का एक साथी अभी फरार है, जिसे पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछाना शुरू कर दिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस ने कई टीमें लगाई हैं। 

यह हमला उनके पुत्र और कांग्रेस विधायक जिशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर हुआ। उपमुख्यमंत्री अजित पवार, सांसद प्रफुल्ल पटेल, मंत्री दिलीप वळसे-पाटील और मंत्री अदिती तटकरे ने इस घटना पर दुःख व्यक्त किया है।

68 वर्षीय राजनेता बाबा सिद्दीकी का लंबा राजनीतिक जीवन रहा है। खास बात ये कि पूर्वी भारत के राज्य बिहार से मीलों दूर मायानगरी में आकर बसने वाले बाबा सिद्दीकी का दशकों बाद भी बिहार से जुड़ाव खत्म नहीं हुआ था।

सितंबर, 1956 में जन्म के बाद बाबा ने छात्र जीवन से ही सियासत की शुरुआत कर दी थी। 1977 में बाबा सिद्दीकी कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) NSUI से जुड़े थे।

बाद में मायानगरी मुंबई के ऐसे इलाके में बाबा सिद्दीकी आकर बस गए, जिसे सितारों के जमघट के लिए जाना जाता है। बांद्रा पश्चिम में बॉलीवुड की कई फिल्मी हस्तियों के घर हैं।

गोपालगंज में जन्म हुआ, पांच दशक पहले मुंबई आए

बांद्रा पश्चिम से विधायक रह चुके बाबा सिद्दीकी सियासत से फुर्सत पाने के बाद बिहार जाते रहते थे। उनसे जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा दो साल पहले ही 2022 में बिहार गए थे।

बिहार के गोपालगंज में जन्मे बाबा सिद्दीकी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान पिता अब्दुल रहीम सिद्दीकी के साथ घड़ी रिपेयर करने का काम करते थे।

लगभग पांच दशक पहले ही पिता ने जब मुंबई शिफ्ट होने का फैसला लिया तो बाबा सिद्दीकी भी परिवार के साथ मुंबई आ गए।

बाबा सिद्दीकी के राजनीतिक जीवन पर एक नजर

  • पहली बार बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में कॉरपोरेटर चुने गए
  • कांग्रेस से शुरू की राजनीतिक पारी, 1977 में एनएसयूआई में शामिल हुए
  • 1980 में बांद्रा युवा कांग्रेस महासचिव, 1982 में बांद्रा युवा कांग्रेस अध्यक्ष और 1988 में मुंबई युवा कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए
  • 1999 में पहली बार बांद्रा पश्चिम सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ विधायक बने
  • 2004 से 2008 तक महाराष्ट्र के खाद्य और श्रम राज्य मंत्री रहे
  • 2014 तक लगातार तीन बार बांद्रा पश्चिम सीट से विधायक रहे
  • 2014 में चुनाव हारने के बाद मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया
  • 2019 में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया
  • फरवरी, 2024 में बाबा सिद्दीकी कांग्रेस छोड़कर अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो गए
  • महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुंबई डिवीजन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं

आई प्रतिक्रिया 

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा, “राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता, पूर्व राज्यमंत्री और विधायिका में लंबे समय तक मेरे सहयोगी बाबा सिद्दीकी पर हुए गोलीबारी की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और वेदनादायक है।

उनके निधन की खबर से मुझे धक्का लगा है। मैंने अपना अच्छा सहयोगी, मित्र खो दिया है। मैं इस भ्याड हमले की कड़ी निंदा करता हूं।”

मंत्री दिलीप वळसे-पाटील ने कहा, “मुझे मेरे मित्र और राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व राज्यमंत्री बाबा सिद्दीकी के निधन की खबर मिली।

यह अत्यंत दुखद और चौंकाने वाली बात है। हम इस कठिन समय में सिद्दीकी परिवार के साथ हैं और प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस दुखद घड़ी में सहेजने की शक्ति मिले।”

राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा, “राज्य की बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था चिंता बढ़ा रही है। मुंबई, जो देश की आर्थिक राजधानी है, में पूर्व राज्यमंत्री बाबा सिद्दीकी पर हुई गोलीबारी खेदजनक है।

गृह मंत्री और सत्ताधारी अगर इतनी ही ढिलाई से राज्य का संचालन करेंगे, तो यह सामान्य जनता के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

सिर्फ जांच नहीं, बल्कि सत्ताधारियों को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से हटने की आवश्यकता है। मैं बाबा सिद्दीकी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवार के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता हूं।”

Santosh SETH

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