संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से: महिला आरक्षण और बगावत पर नजर
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से: महिला आरक्षण बिल पर सरकार की नई रणनीति, TMC-शिवसेना के बागी सांसदों पर स्पीकर के फैसले का रहेगा इंतज़ार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। यह सत्र तीन सप्ताह तक चलने की संभावना है, हालांकि संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (CCPA) द्वारा अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।
यह सत्र सरकार के लिए न केवल विधायी दृष्टिकोण से, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाने की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला आरक्षण बिल पर फिर मंथन
पिछला सत्र महिला आरक्षण विधेयक के पारित न हो पाने के कारण चर्चा में रहा था। अब सरकार एक बार फिर इस संविधान संशोधन विधेयक को निचले सदन में लाने की तैयारी कर रही है।
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नई रूपरेखा: सरकार इस विधेयक के मसौदे को फिर से तैयार कर रही है।
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50% सीटों में वृद्धि: संभावना है कि सरकार सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि करने पर विचार कर रही है। यह कदम दक्षिणी राज्यों की उन चिंताओं को दूर करने के लिए उठाया जा सकता है, जो जनसंख्या के आधार पर सीटों में वृद्धि को लेकर चिंतित थे।
TMC और शिवसेना (UBT) सांसदों की बगावत का असर
हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा और सहयोगियों की जीत के बाद यह सत्र और भी दिलचस्प हो गया है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उबाठा) में हुई बगावत का असर सत्र की कार्यवाही पर साफ दिखने की उम्मीद है।
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ओम बिरला के फैसले पर टिकी नजरें: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को TMC के 20 और शिवसेना (उबाठा) के 6 बागी सांसदों की उस मांग पर निर्णय लेना है, जिसमें उन्होंने खुद को ‘अलग गुट’ के तौर पर मान्यता देने की याचिका दायर की है।
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सत्र से पहले फैसला: सूत्रों का कहना है कि लोकसभा स्पीकर मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही इन दोनों मामलों में अपना फैसला सुना सकते हैं।
बढ़ती सत्तापक्ष की ताकत
राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के बाद एनडीए (NDA) का संख्या बल काफी मजबूत हो गया है।
सरकार की कोशिश रहेगी कि पिछले सत्र में जो बिल अटक गए थे, उन्हें इस बार बहुमत के साथ पारित कराया जाए।
आने वाले दिन यह तय करेंगे कि सरकार अपने विधायी एजेंडे को लेकर विपक्ष के साथ कैसा तालमेल बिठाती है और दल-बदल से जुड़े इन जटिल मसलों को स्पीकर किस तरह सुलझाते हैं।











