IMD Monsoon Forecast 2026

मानसून पूर्वानुमान 2026: इस साल देश में ‘सामान्य से कम’ बारिश के आसार

मानसून 2026: इस साल देश में ‘सामान्य से कम’ बारिश का अनुमान, ‘अल नीनो’ का दिखेगा असर; IMD ने जारी किया पहला पूर्वानुमान

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खबर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए अपना पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है।

मौसम विभाग के नवीनतम गतिशील और सांख्यिकीय मॉडलों (MME और MMCFS) के अनुसार, इस वर्ष मानसून के दौरान देश भर में ‘सामान्य से कम’ बारिश होने की संभावना है।

क्या कहता है IMD का मात्रात्मक पूर्वानुमान?

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष मानसूनी वर्षा अपने दीर्घकालिक औसत (LPA) का 92% रहने का अनुमान है (जिसमें ± 5% की मॉडल त्रुटि की गुंजाइश है)।

बता दें कि 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश में मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत (LPA) 87 सेंटीमीटर है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो इस साल मानसून के दौरान 90-95% (सामान्य से कम) बारिश होने की ही सबसे अधिक संभावना है।

सूखे की आशंका! बारिश की श्रेणियों के आंकड़े:

आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल देश में ‘न्यून’ (Deficient) और ‘सामान्य से नीचे’ (Below Normal) बारिश होने की आशंका सबसे ज्यादा है।

वर्ग वर्षा की सीमा (LPA का %) इस वर्ष पूर्वानुमान संभावना (%) जलवायवीय (सामान्य) संभावना (%)
न्यून (Deficient) 90% से कम 35% 16%
सामान्य से नीचे (Below Normal) 90 – 95% 31% 17%
सामान्य (Normal) 96 – 104% 27% 33%
सामान्य से ऊपर (Above Normal) 105 – 110% 6% 16%
अधिकता (Excess) 110% से अधिक 1% 17%

(इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सामान्य या उससे अधिक बारिश होने की संभावना इस बार काफी कम है।)

देश के किन हिस्सों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

स्थानिक वितरण (Regional Distribution) को देखें तो देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की प्रबल संभावना है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश हो सकती है।

बारिश कम होने के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?

भारतीय मानसून पर प्रशांत और हिंद महासागर की स्थितियों का सबसे गहरा प्रभाव पड़ता है। इस बार बारिश कम होने के पीछे मुख्य रूप से ‘अल नीनो’ (El Niño) को कारण माना जा रहा है:

  • प्रशांत महासागर (El Niño का खतरा): वर्तमान में प्रशांत क्षेत्र में कमजोर ‘ला नीना’ जैसी स्थितियां अब ‘ENSO-तटस्थ’ (Neutral) में बदल रही हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून के दौरान ‘अल नीनो’ की स्थितियां पूरी तरह विकसित हो सकती हैं। ‘अल नीनो’ अक्सर भारत में कमजोर मानसून और कम बारिश का कारण बनता है।

  • हिंद महासागर (IOD): वर्तमान में ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ (IOD) तटस्थ बना हुआ है। हालांकि, मानसून के अंत तक इसके ‘सकारात्मक IOD’ में बदलने की उम्मीद है, जो मानसून के लिए थोड़ी अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है।

उत्तरी गोलार्ध में हिमपात का असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का आवरण (Snow Cover) सामान्य से थोड़ा कम रहा है।

जलवायु विज्ञान के अनुसार, यूरेशिया और उत्तरी गोलार्ध में हिमपात और भारतीय मानसून के बीच विपरीत संबंध होता है, जिस पर विभाग की नजर बनी हुई है।

मई के अंत में आएगा अपडेटेड पूर्वानुमान

आईएमडी की नई दो-चरणीय पूर्वानुमान रणनीति के तहत, भारत के चार मुख्य क्षेत्रों और ‘मानसून कोर ज़ोन’ (MCZ) के लिए अधिक विस्तृत और अद्यतन (Updated) पूर्वानुमान मई के अंत तक जारी किया जाएगा, जिससे राज्यवार तस्वीर और अधिक साफ हो सकेगी।

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