भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मैप पर स्थापित करने के लिए मोदी कैबिनेट ने ₹1.27 लाख करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ 'सेमीकॉन 2.0' योजना को मंजूरी दी है।
मोदी कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: ₹1.27 लाख करोड़ के भारी बजट के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी, भारत बनेगा ग्लोबल चिप हब”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने के लिए मोदी सरकार ने एक गेम-चेंजर फैसला लिया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0) योजना को मंजूरी दे दी है।
इस महात्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया है।
यह कदम सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करता है।
‘सेमीकॉन 1.0’ की सफलता को आगे बढ़ाते हुए नया चरण देश की आर्थिक वृद्धि, राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
इस नई नीति के तहत संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को खड़ा करने के लिए छह मुख्य क्षेत्रों (स्तंभों) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
चिप डिजाइन (Design): भारत को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन आईपी (बौद्धिक संपदा) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना। देश में 105 स्टार्टअप पहले ही चिप्स विकसित करना शुरू कर चुके हैं। अब रणनीतिक और व्यावसायिक उत्पादों के विकास पर ध्यान रहेगा।
मशीनें और सामग्रियां (Machines & Materials): चिप निर्माण के लिए जरूरी मशीनों, विशेष रसायनों और गैसों के निर्माण से जुड़े अनुसंधान एवं विकास (R&D) को भारी प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे सटीक विनिर्माण उद्योग की नींव मजबूत होगी।
अधिक फैब (Fabs) की स्थापना: भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है। साल 2028 तक भारत के पहले फैब के चालू होने की उम्मीद है। अब देश में सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब स्थापित करने के लिए वैश्विक निर्माताओं को आकर्षित किया जाएगा।
एटीएमपी/ओएसएटी (ATMP/OSAT) का सुदृढ़ीकरण: एडवांस्ड पैकेजिंग और एटीएमपी इकाइयों की सफलता के बाद दुनिया भारत को एक बड़े वैकल्पिक केंद्र के रूप में देख रही है। अब सबसे उन्नत एटीएमपी तकनीकों को भारत में लाने पर काम होगा।
उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D): 28एनएम-110एनएम नोड से शुरू हुए भारत के सफर को अब वैश्विक और घरेलू अनुसंधान केंद्रों के साथ मिलकर और अधिक उन्नत व आधुनिक नोड्स की तकनीक विकसित करने की दिशा में बढ़ाया जाएगा।
प्रतिभा विकास (Talent Development): देश के 315 विश्वविद्यालय अत्याधुनिक ईडीए (EDA) टूल्स का उपयोग करके छात्रों को चिप डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। अब तक 68,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। कॉलेज स्तर पर इस प्रशिक्षण को और गहन व व्यावहारिक बनाया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में पहले चरण की प्रगति की भी सराहना की गई, जिसके आंकड़े इस प्रकार हैं:
विशाल निवेश: अब तक 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कुल निवेश के साथ 12 विनिर्माण इकाइयों (1 सिलिकॉन फैब, 1 सिलिकॉन कार्बाइड फैब, 1 गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और 9 पैकेजिंग इकाइयां) को मंजूरी दी जा चुकी है।
वाणिज्यिक उत्पादन शुरू: स्वीकृत प्रस्तावों में से तीन बड़ी कंपनियों—माइक्रोन (Micron), केन्स (Kaynes) और सीजी सेमी (CG Semi) ने अपना वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक और इकाई का उत्पादन 2026 में शुरू होने की उम्मीद है।
डिजाइन स्टार्टअप्स को पंख: स्टार्टअप्स और एमएसएमई की 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है। ये कंपनियां उपग्रह संचार, ड्रोन, एआई सिस्टम, स्मार्ट मीटर और आईओटी (IoT) उपकरणों के लिए चिप्स और एसओसी (SoC) डिजाइन कर रही हैं।
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