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बिना टावर सीधे सैटेलाइट से जुड़ेंगे मोबाइल, DoT का बड़ा कदम

‘सभी के लिए कनेक्टिविटी’: अब बिना टावर सीधे सैटेलाइट से जुड़ेंगे मोबाइल! दूरसंचार विभाग ने D2D तकनीक पर किया महा-मंथन “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

नई दिल्ली: भारत में संचार क्रांति को एक नए स्तर पर ले जाने और देश के हर कोने को इंटरनेट से जोड़ने के लिए सरकार ‘डायरेक्ट-टू-डिवाइस’ (D2D) तकनीक पर तेजी से काम कर रही है।

‘सभी के लिए कनेक्टिविटी’ (Connectivity for All) के विजन को साकार करने के उद्देश्य से गुरुवार को दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (TEC) ने नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय तकनीकी वेबिनार का आयोजन किया।

इस वेबिनार का शीर्षक “D2D का क्षेत्र: प्रौद्योगिकी, वैश्विक प्राथमिकता और भारतीय संदर्भ” रखा गया था।

इसमें उभरती हुई D2D उपग्रह संचार प्रौद्योगिकियों (Satellite Communication) पर विचार-विमर्श करने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञ, उद्योग हितधारक और नीति निर्माता एक मंच पर आए।

दूरदराज के इलाकों में मिलेगी निर्बाध डिजिटल पहुंच

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन दूरसंचार विभाग के सदस्य (प्रौद्योगिकी) श्री रुद्र नारायण पालाई ने किया।

उन्होंने सरकार के ‘सभी के लिए कनेक्टिविटी’ के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए अगली पीढ़ी के कनेक्टिविटी समाधानों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि D2D तकनीक के माध्यम से देश के सबसे दूरस्थ, दुर्गम और कम सेवा वाले क्षेत्रों में भी निर्बाध और समावेशी डिजिटल पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।

इस कार्यक्रम में IN-SPACe, वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (WPC) विंग, TEC और DoT के शीर्ष अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

वैश्विक कंपनियों ने साझा की तकनीकी प्रगति की जानकारी

तकनीकी सत्रों में D2D उपग्रह संचार के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनी ‘एएसटी स्पेस मोबाइल’ (AST SpaceMobile) और भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी ‘वोडाफोन आइडिया लिमिटेड’ (VIL) के विशेषज्ञों ने विस्तार से अपनी बात रखी।

विशेषज्ञों ने नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) इकोसिस्टम में हो रहे वैश्विक विकास और परिनियोजन (Deployment) मॉडल पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की।

आपदा प्रबंधन और भौगोलिक चुनौतियों में बनेगा ‘ब्रह्मास्त्र’

भारतीय संदर्भ में चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि D2D तकनीक भारत के लिए कितनी फायदेमंद हो सकती है।

यह तकनीक उन भौगोलिक रूप से दुर्गम इलाकों (पहाड़ों, जंगलों और द्वीपों) में कनेक्टिविटी की कमी को दूर करेगी, जहां मोबाइल टावर लगाना संभव नहीं है।

सबसे बड़ी बात यह है कि आपदा के समय जब सामान्य नेटवर्क (Terrestrial Network) ध्वस्त हो जाते हैं, तब मानक मोबाइल उपकरण सीधे उपग्रह (Satellite) से जुड़कर संचार बहाल कर सकेंगे।

बैठक के अंत में दूरसंचार विभाग ने डिजिटल रूप से सशक्त भारत की परिकल्पना को दोहराते हुए कहा कि वह अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने, नवाचार को बढ़ावा देने और एक दूरदर्शी नीतिगत ढांचा तैयार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Santosh SETH

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