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पश्चिम बंगाल का महासंग्राम: 294 सीटों पर 2 चरणों में होगी वोटिंग, 4 मई को नतीजे | The Politics Again

‘पश्चिम बंगाल का महासंग्राम: 294 सीटों पर 2 चरणों में होगी वोटिंग, 23 और 29 अप्रैल को मतदान, 4 मई को आएगा फैसला ‘

कोलकाता/नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश के चार प्रमुख राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम—और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सत्ता का महासंग्राम आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है।

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार शाम 4 बजे विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी तारीखों का बहुप्रतीक्षित ऐलान कर दिया है।

इस घोषणा के साथ ही सभी चुनावी राज्यों में ‘आदर्श आचार संहिता’ (Model Code of Conduct) तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।

सबसे अधिक ध्यान राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील पश्चिम बंगाल पर केंद्रित है। बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए होने वाला यह मुकाबला काफी दिलचस्प और कांटे का होने वाला है।

बंगाल में 2 चरणों में चुनाव: क्या है कार्यक्रम?

भौगोलिक आकार, संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदान को दो चरणों में संपन्न कराने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है:

  • पहला चरण (Phase 1): 23 अप्रैल 2026

  • दूसरा चरण (Phase 2): 29 अप्रैल 2026

  • नतीजे (Counting Date): 4 मई 2026

(नोट: चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, तमिलनाडु में चुनाव अप्रैल के दूसरे हफ़्ते की संभावनाओं को विराम देते हुए 23 अप्रैल को एक ही चरण में तय किए गए हैं, जबकि असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी।)

क्यों जरूरी हैं ये चुनाव? (विधानसभाओं का कार्यकाल)

संविधान के नियमों के अनुसार, मौजूदा सरकारों का कार्यकाल खत्म होने से पहले नई विधानसभा का गठन अनिवार्य होता है।

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून के बीच इस प्रकार खत्म हो रहा है:

  • पश्चिम बंगाल: 7 मई 2026

  • तमिलनाडु: 10 मई 2026

  • असम: 20 मई 2026

  • केरल: 23 मई 2026

  • पुडुचेरी: 15 जून 2026

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और आचार संहिता लागू

पश्चिम बंगाल और असम जैसे बड़े और संवेदनशील राज्यों में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भारी तैनाती की जा रही है।

वहीं, आचार संहिता लागू होने के बाद अब राज्य सरकारें कोई भी नई नीतिगत घोषणा या लोकलुभावन योजनाओं का ऐलान नहीं कर सकेंगी।

सभी राजनीतिक दलों ने भी अब अपनी कमर कस ली है और रैलियों-जनसभाओं का दौर तेज होने वाला है।

Santosh SETH

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