दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में ओमानी पायलट के हमले के बाद इजरायल की सुरक्षा एजेंसी 'शिन बेट' और खुफिया जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या दुनिया की सबसे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था में लग गई सेंध? फ्लाईदुबई हाईजैक प्रयास ने इजरायल के ‘शिन बेट’ पर खड़े किए गंभीर सवाल”
तेल अवीव/दुबई: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
दुनिया भर में अपने अभेद्य सुरक्षा तंत्र और अचूक खुफिया एजेंसियों (मोसाद और शिन बेट) के लिए मशहूर इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था आज कठघरे में है।
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) की उड़ान (FZ-1073) के कॉकपिट में हुए हाईजैक और क्रैश के प्रयास ने एक ऐसा गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब इजरायल के सुरक्षा रणनीतिकार अब तक तलाश रहे हैं।
सवाल यह है कि जब इजरायल के नियम ऐसे देशों (जिनसे उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं) के पायलटों को उड़ान संचालित करने की इजाजत नहीं देते,
तो फिर ओमान का पायलट हमाम अल हमामी (Hamam Alhamami) इजरायल जाने वाली इस फ्लाइट के कॉकपिट तक कैसे पहुंच गया?
2020 के ऐतिहासिक ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) के बाद बनाए गए इजरायली सुरक्षा नियमों में यह स्पष्ट प्रावधान था कि जिन देशों के इजरायल से राजनयिक संबंध नहीं हैं, उनके पायलट इजरायल आने वाली उड़ानें संचालित नहीं कर सकते।
ओमान का इजरायल से कोई राजनयिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद, इजरायली चैनल 12 की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों ओमानी पायलटों को तेल अवीव में उड़ान भरने की अनुमति दी है।
सबसे बड़ी चूक यह रही कि इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी ‘शिन बेट’ (Shin Bet) ने विदेशी एयरलाइनों के पायलटों की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि (Background) की खुद स्वतंत्र जांच करने की बजाय, एयरलाइनों पर ही यह भरोसा कर लिया कि वे ऐसे प्रतिबंधित पायलटों को इजरायल नहीं लाएंगे।
इजरायली परिवहन मंत्रालय का कहना है कि शिन बेट ने फ्लाईदुबई को लेकर पहले कभी कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की थी, सिर्फ सामान की जांच बढ़ाने को कहा गया था।
इस घटना ने जांच एजेंसियों के होश तब उड़ा दिए जब पता चला कि आरोपी ओमानी सह-पायलट हमाम अल हमामी का अतीत भी संदिग्ध था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे पहले ही ‘ओमान एयर’ (Oman Air) से उसके कट्टरपंथी और चरमपंथी विचारों के कारण हटा दिया गया था। इसके बावजूद, फ्लाईदुबई जैसी एयरलाइन ने बिना गहन जांच के उसे नौकरी पर रख लिया।
भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार और यात्रियों की सूझबूझ से भले ही विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतार लिया गया हो और 170 यात्रियों की जान बच गई हो, लेकिन इस घटना ने इजरायल के भीतर हड़कंप मचा दिया है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आशंका जताई है कि आरोपी पायलट ने इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित होकर विमान को गिराने का इरादा किया था।
अब यूएई (UAE), सऊदी अरब और इजरायल (मोसाद और शिन बेट) संयुक्त रूप से इस बात की गहन जांच कर रहे हैं कि क्या हमामी ने यह हमला अकेले किया था या इसके पीछे किसी बड़े आतंकी संगठन (या ईरान) की कोई गहरी साजिश थी।
बहरहाल, यह घटना इजरायल की सुरक्षा प्रणाली के लिए सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक ‘लाल अलार्म’ (Red Alarm) है, जो यह सोचने पर मजबूर करती है कि भरोसा जांच का विकल्प कभी नहीं हो सकता।
| सवाल / मुद्दा | घटना के तथ्य और जांच |
| मुख्य सवाल | ओमान (गैर-राजनयिक देश) का पायलट इजरायल जाने वाली फ्लाइट में कैसे था? |
| इजरायल का नियम | गैर-राजनयिक देशों (जैसे ओमान) के पायलटों पर इजरायल के लिए उड़ान भरने पर प्रतिबंध है। |
| सुरक्षा में चूक | ‘शिन बेट’ ने पायलटों के बैकग्राउंड की स्वतंत्र जांच के बजाय एयरलाइंस पर भरोसा किया। |
| आरोपी का बैकग्राउंड | हमाम अल हमामी को पहले कट्टरपंथी विचारों के कारण ‘ओमान एयर’ से हटाया जा चुका था। |
| हमले का मकसद | पीएम नेतन्याहू के अनुसार, आरोपी ने कट्टरपंथी सोच के तहत विमान गिराने की कोशिश की। |
| जांच एजेंसियां | मोसाद (Mossad), शिन बेट (Shin Bet) और यूएई (UAE) की संघीय जांच एजेंसियां। |
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