CEC के इस्तीफे की मांग, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव हिरासत में
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: जंतर-मंतर पर मार्च कर रहे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और AISA अध्यक्ष समेत 150 हिरासत में”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : हीरा नन्द किशोर की रिपोर्ट
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर उठे विवाद ने अब सड़क पर बड़े विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली के पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
हिरासत में लिए गए प्रमुख लोगों में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल हैं।
यह लगातार दूसरा दिन है जब चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली है।
पुलिस पर महिलाओं से बदसलूकी और बल प्रयोग का आरोप
अधिकारियों के मुताबिक, नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत बिना अनुमति 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने बैरिकेडिंग कर रखी थी।
AISA ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर जा रहे 500 से अधिक लोगों पर पुलिस ने बेवजह बल प्रयोग किया।
AISA के बयान के अनुसार, “पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ बदसलूकी की और उन्हें गलत तरीके से छुआ।”
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को 10 अन्य लोगों के साथ कोतवाली थाने ले जाया गया, जबकि प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज और अंजलि (डीयू AISA सचिव) को बदरपुर थाने भेज दिया गया।
प्रदर्शन में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन और पल्लव सिसोदिया भी शामिल हुए थे।
क्या है पूरा विवाद और SIR का मुद्दा?
यह पूरा विवाद ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ‘मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
उनका आरोप था कि CEC ज्ञानेश कुमार ने उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना ये आदेश जारी किए थे।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य बात है और आयोग के सभी आदेश पूरी कानूनी प्रक्रिया और मंजूरी के बाद ही जारी किए जाते हैं।
शुक्रवार को भी 1,000 लोग हुए थे हिरासत में, दर्ज हुईं 3 FIR
शनिवार की घटना से एक दिन पहले, शुक्रवार को भी पुलिस ने करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोककर हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया था।
शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत 3 FIR दर्ज की हैं।
पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी व्यक्ति विशेष को नामजद नहीं किया गया है, लेकिन आयोजकों का विवरण दर्ज किया गया है।
CEC इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में प्रदर्शन: एक नजर में
| विषय / बिंदु | महत्वपूर्ण जानकारी |
| प्रदर्शन का मुख्य कारण | CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता |
| विवाद का मूल बिंदु | SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) आदेशों पर अन्य चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्ति |
| हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरे | प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज, नेहा बोरा (AISA अध्यक्ष) |
| कुल हिरासत (शनिवार) | लगभग 150 प्रदर्शनकारी (अलग-अलग थानों में भेजे गए) |
| AISA का पुलिस पर आरोप | पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी और बल प्रयोग |
| पुलिस की कार्रवाई का आधार | नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 (निषेधाज्ञा) का उल्लंघन |
| दर्ज FIR | शुक्रवार के प्रदर्शन पर BNS की धारा 223 के तहत 3 FIR दर्ज |











