बिहार में बढ़ते अपराध पर अपनी ही सरकार को घेरने वाले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
“शर्म आती है कि मैं इस सरकार में हूं”: बिहार में कानून-व्यवस्था पर चिराग का तीखा वार, महज़ गुस्सा या यूपी 2027 का सियासी खेल?
पटना/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
“मुझे शर्म आती है कि मैं इस सरकार के साथ हूं… प्रशासन पूरी तरह निकम्मा हो चुका है।” यह तल्ख और आक्रामक बयान किसी विपक्षी नेता का नहीं,
बल्कि केंद्र सरकार में काबिज कैबिनेट मंत्री और खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ बताने वाले लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का है।
बिहार में बेलगाम अपराध, दलितों और बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिराग के इन बगावती तेवरों ने पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी भूचाल ला दिया है।
हैरानी की बात यह है कि जिस सरकार की कार्यशैली पर चिराग खुले मंच से सवाल खड़े कर रहे हैं, लोजपा (रा) खुद उसमें साझीदार है।
बिहार में लोजपा (रा) के 19 विधायक हैं, सरकार में दो मंत्री हैं और केंद्र में खुद चिराग कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं, गृह विभाग की कमान सीधे तौर पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व यानी सम्राट चौधरी के हाथों में है।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर अपनों पर ही चिराग के इस तीखे वार के पीछे की असली सियासी पटकथा क्या है?
26 सितंबर को एक मीडिया कॉन्क्लेव के दौरान जब चिराग पासवान से पूछा गया कि क्या बिहार में अपराधी बेखौफ हैं और बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
चिराग ने दो टूक कहा, “आज की तारीख में कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। सरकार का हिस्सा होने के नाते मैं इस सवाल से भाग नहीं सकता।
मुझे खुद शर्मिंदगी होती है जब मैं सोचता हूं कि मैं ऐसी सरकार के साथ हूं जहां ऐसी घटनाएं घट रही हैं।”
चिराग ने आगे कहा कि आज बिहार की कोई भी बच्ची शाम को बाहर निकलने से पहले सौ बार सोचती है।
अगर सरकार जनता को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती, तो वे इसे कतई स्वीकार नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि जिस तरह के बयानों और शब्दावली का इस्तेमाल कभी भाजपा और एनडीए के बड़े नेता राजद के ‘लालू राज’ पर निशाना साधने के लिए करते थे, आज वही भाषा चिराग ने एनडीए सरकार के खिलाफ इस्तेमाल की है।
चिराग के इस बयान के बाद विपक्ष को एनडीए सरकार पर हमला बोलने का खुला मौका मिल गया है।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जोरदार तंज कसते हुए लिखा, “इस्तीफा देने के लिए किस शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं चिराग पासवान?
शर्म का बोझ उठाकर भी सत्ता का हिस्सा बने रहना कोई इनसे सीखे। जब सरकार में रहकर इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है, तो इस्तीफा देने की हिम्मत कौन से मुहूर्त में दिखाएंगे?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान का यह हमला अनायास नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
2025 के विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने जून-जुलाई में इसी तरह कानून-व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार पर हमला बोला था और कहा था कि पुलिस ने अपराधियों के आगे सरेंडर कर दिया है।
सियासी जानकारों के मुताबिक, यह एनडीए गठबंधन के भीतर दबाव बनाने (Bargaining) का पुराना आजमाया हुआ फॉर्मूला है।
साल 2020 के बिहार चुनाव में भी जब चिराग को मनमुताबिक सीटें नहीं मिली थीं, तो उन्होंने अकेले चुनाव लड़कर जेडीयू को भारी सियासी नुकसान पहुंचाया था।
वे गठबंधन के भीतर अपनी ताकत को कम नहीं होने देना चाहते और बयानों के जरिए अपनी शर्तों पर बात मनवाने का दबाव बनाते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू उत्तर प्रदेश से जुड़ता दिख रहा है। 28 सितंबर को प्रयागराज में आयोजित ‘यूथ बोले तो’ संवाद कार्यक्रम में चिराग पारंपरिक राजनेता का चोला उतारकर जींस-टीशर्ट में युवाओं के बीच पहुंचे थे।
वहां उन्होंने बड़ा एलान करते हुए साफ कर दिया कि लोजपा (रामविलास) यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है और पार्टी 2027 का यूपी चुनाव हर हाल में लड़ेगी—चाहे गठबंधन हो या न हो।
उत्तर प्रदेश में भाजपा पहले से ही निषाद पार्टी, सुभासपा और आरएलडी जैसे सहयोगियों की सीटों की मांग से जूझ रही है। ऐसे में भाजपा यूपी में किसी नए दल को बड़ा हिस्सा देने के मूड में नहीं दिखती।
यही वजह है कि चिराग बिहार में कानून-व्यवस्था के बहाने एनडीए पर आक्रामक दबाव बनाकर यूपी चुनाव 2027 की सीट शेयरिंग टेबल पर अपनी सौदेबाजी की ताकत मजबूत करने की जुगत में हैं।
| आयाम / पहलू | राजनीतिक विश्लेषण व तथ्य |
| चिराग का तीखा बयान | “शर्म आती है कि मैं इस सरकार में हूं, प्रशासन पूरी तरह निकम्मा हो चुका है।” |
| सत्ता में लोजपा (रा) की स्थिति | केंद्र में 1 कैबिनेट मंत्री, बिहार विधानसभा में 19 विधायक व 2 मंत्री। |
| विपक्ष का पलटवार | रोहिणी आचार्य ने पूछा- “शर्मिंदगी है तो इस्तीफा देने के लिए किस मुहूर्त का इंतजार?” |
| दबाव की पुरानी रणनीति | 2020 में अकेले लड़कर नुकसान पहुंचाया; 2025 चुनाव से पहले भी सरकार को घेरा था। |
| यूपी 2027 का एंगल | प्रयागराज से चुनावी आगाज; सभी 403 सीटों पर गठबंधन या अकेले लड़ने का एलान। |
| अंतिम सियासी निष्कर्ष | बिहार में कानून-व्यवस्था पर हमला कर यूपी में भाजपा से सीट शेयरिंग पर मोलभाव की तैयारी। |
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