देवेंद्र फडणवीस जीत का जश्न मनाते हुए

महाराष्ट्र बीएमसी चुनाव: 25 साल बाद ढहा ‘मातोश्री’ का अभेद किला

“भाजपा-शिंदे गठबंधन ने मुंबई में लहराया परचम; सत्तारूढ़ गठबंधन को 118 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत, उद्धव गुट 65 सीटों पर सिमटा”

(विशेष संवाददाता, मुंबई) The Politics Again |

देश की सबसे अमीर और प्रतिष्ठित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने ठाकरे परिवार के 25 साल पुराने गढ़ को भेदते हुए शानदार जीत हासिल की है।

227 सीटों वाली बीएमसी में सत्तारूढ़ गठबंधन ने 118 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत के 114 के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है।नौ साल के लंबे अंतराल के बाद हुए इन चुनावों ने मुंबई की सत्ता की चाबी अब आधिकारिक तौर पर भाजपा-शिंदे गठबंधन के हाथों में सौंप दी है।

भाजपा बनी ‘बड़ी भाई’, शिंदे गुट का भी शक्ति प्रदर्शन

चुनाव परिणामों के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा 89 सीटों पर जीत दर्ज कर बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटों पर कब्जा जमाया।

दूसरी ओर, 1997 से बीएमसी पर एकछत्र राज करने वाली शिवसेना (अब उद्धव गुट) को करारा झटका लगा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) का महाविकास अघाड़ी गठबंधन केवल 72 सीटों तक ही सीमित रह गया।

दलगत स्थिति एक नज़र में:

  • भाजपा: 89

  • शिवसेना (UBT): 65

  • शिवसेना (शिंदे गुट): 29

  • कांग्रेस: 24

  • एआईएमआईएम: 08

  • मनसे (राज ठाकरे): 06

  • एनसीपी (अजित पवार): 03

  • सपा: 02

  • एनसीपी (शरद पवार): 01

  • निर्दलीय: 02

दिग्गजों की साख गिरी, कई बड़े चेहरे हारे

इस चुनाव ने कई स्थापित नेताओं के करियर पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। बदलाव की इस लहर में कई कद्दावर पार्षदों और नेताओं के रिश्तेदारों को हार का मुंह देखना पड़ा:

  • शिंदे गुट को झटका: पूर्व विधायक सदा सरवणकर के बेटे समाधान और बेटी प्रिया दोनों को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, लालबाग से टिकट न मिलने पर यूबीटी छोड़ शिंदे गुट में आए बीईएसटी समिति के पूर्व अध्यक्ष अनिल कोकिल भी चुनाव हार गए।

  • भाजपा की हार: रवि राजा, विनोद मिश्रा, प्रीति पाटकर और राजुल समीर देसाई जैसे जाने-माने चेहरे अपनी सीट नहीं बचा सके।

  • विपक्ष की हार: कांग्रेस की पूर्व पार्षद शीतल म्हात्रे और एनसीपी के कैप्टन मलिक भी पराजित हुए।

नार्वेकर परिवार का दबदबा और अमीर उम्मीदवार की जीत

दक्षिण मुंबई में विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर के परिवार का जलवा देखने को मिला। मुंबई के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शुमार और राहुल नार्वेकर के भाई मकरंद नार्वेकर (124 करोड़ की संपत्ति) ने कोलाबा से जीत हासिल की।

उनके साथ ही राहुल नार्वेकर की भाभी हर्षिता (वार्ड 225) और चचेरी बहन गौरवी शिवलकर-नार्वेकर (वार्ड 227) ने भी जीत दर्ज कर परिवार की राजनीतिक पकड़ मजबूत की।

उद्धव गुट के लिए राहत की बात यह रही कि पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर, श्रद्धा जाधव और मिलिंद वैद्य जैसे वरिष्ठ नेता अपनी सीटें बचाने में कामयाब रहे।

मतगणना में देरी और ईवीएम विवाद

शुक्रवार को मतगणना प्रक्रिया विवादों और देरी से अछूती नहीं रही। सुबह 10 बजे शुरू हुई गिनती कई कारणों से धीमी रही।

  • तकनीकी पेंच: नगर निगम आयुक्त भूषण गागरानी के अनुसार, घाटकोपर के एक वार्ड में ईवीएम की ‘प्रिंटिंग ऑक्सीलरी डिस्प्ले यूनिट’ (PADU) यानी नकली कंट्रोल यूनिट के इस्तेमाल की बात सामने आई, जिससे प्रक्रिया बाधित हुई।

  • पुनर्मतगणना: कई वार्डों में कांटे की टक्कर के कारण उम्मीदवारों ने री-काउंटिंग की मांग की, जिससे अंतिम नतीजे देर शाम तक साफ हो पाए।

क्या बदला?

2017 के चुनावों में जब भाजपा और शिवसेना (अविभाजित) अलग-अलग लड़े थे, तब शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी और भाजपा 82 सीटों पर थी। लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। भाजपा ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर 89 कर ली है, जबकि विभाजित शिवसेना (UBT) 65 पर आ गई है।

मतदान का हाल: कोलाबा रहा सबसे उदासीन

मुंबईकरों का मतदान के प्रति रुझान मिश्रित रहा। शहर का औसत मतदान 52.94% रहा। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा वीआईपी इलाके कोलाबा (वार्ड 227) से आया, जहाँ सबसे कम 20.88% मतदान दर्ज किया गया।

निष्कर्ष: बीएमसी के ये नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं। यह जीत न केवल भाजपा-शिंदे गठबंधन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है कि मुंबई का मूड बदल चुका है।

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