अंबरनाथ में ‘महा-संग्राम’: कांग्रेस ने 12 बागी पार्षदों को निकाला, फडणवीस ने दी कार्रवाई की चेतावनी

“अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता के लिए बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुए “अस्वभाविक गठबंधन” ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है”

मुंबई/अंबरनाथ 07 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जहाँ एक ओर कांग्रेस ने अपने सभी बागियों पर गाज गिराई है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि वैचारिक रूप से कांग्रेस के साथ गठबंधन किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

1. कांग्रेस का बड़ा एक्शन: सभी 12 पार्षद निलंबित

अंबरनाथ में बीजेपी के साथ हाथ मिलाने वाली कांग्रेस इकाई पर प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा प्रहार किया है।

  • निलंबन: प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बीजेपी के साथ गठबंधन करने वाले सभी 12 पार्षदों को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया है।

  • कार्यकारिणी बर्खास्त: अनुशासनहीनता को देखते हुए अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारिणी को भी बर्खास्त कर दिया गया है।

  • संदेश: कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर भी बीजेपी के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

2. ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ और शिंदे गुट की नाराजगी

60 सीटों वाली नगर परिषद में शिवसेना (शिंदे) 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन बीजेपी (14) ने कांग्रेस (12) और एनसीपी-AP (4) के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बना ली।

  • शिंदे गुट का हमला: विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे ‘अभद्र गठबंधन’ करार दिया।

  • श्रीकांत शिंदे का सवाल: सांसद श्रीकांत शिंदे ने सीधे बीजेपी नेतृत्व से सवाल किया कि “कांग्रेस मुक्त भारत” का नारा देने वाली पार्टी अब उनके साथ क्या कर रही है?

3. बीजेपी की सफाई: “25 साल का भ्रष्टाचार बनाम विकास”

बीजेपी उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने शिंदे गुट पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • शिंदे गुट पिछले 25 वर्षों से अंबरनाथ में भ्रष्टाचार में लिप्त है।

  • बीजेपी ने कई बार चर्चा की कोशिश की, लेकिन शिंदे गुट के नेताओं ने कोई जवाब नहीं दिया।

  • उनके अनुसार, भ्रष्ट सत्ता के साथ रहने से बेहतर एक नया विकल्प देना था।

4. फडणवीस का अल्टीमेटम: “गठबंधन सुधारा जाएगा”

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्थानीय नेताओं को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अंबरनाथ का यह फैसला पार्टी की नीति के खिलाफ है और इसे जल्द ही सुधारा जाएगा। बीजेपी आलाकमान किसी भी हाल में कांग्रेस समर्थित सरकार का हिस्सा नहीं रहेगा।

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