केरल के वायनाड में भारी बारिश के कारण मेप्पाडी-कल्लाडी टनल निर्माण स्थल पर एक भयानक भूस्खलन हुआ, जिसमें अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है।
वायनाड में टनल निर्माण स्थल पर भयानक भूस्खलन: 3 लोगों की मौत, 5 लापता; इसे क्यों कहा जा रहा है ‘मानव-निर्मित आपदा’?
वायनाड : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट
केरल के पहाड़ी जिले वायनाड (Wayanad) से मंगलवार (7 जुलाई 2026) को एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई।
भारी बारिश के बीच मेप्पाडी के पास कल्लाडी इलाके में एक निर्माणाधीन टनल (सुरंग) स्थल पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन (Landslide) हुआ है।
इस भयानक हादसे में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 5 अन्य लोग लापता बताए जा रहे हैं।
यह हादसा मंगलवार सुबह कल्लाडी इलाके में मीनाक्षी पुल के पास हुआ, जहां कोझिकोड को वायनाड से जोड़ने वाले ‘अनाक्कमपोइल-कल्लाडी-मेप्पाडी टनल रोड प्रोजेक्ट’ का काम चल रहा था।
भारी बारिश के कारण टनल निर्माण के दौरान खोदी गई मिट्टी और मलबे का एक बहुत बड़ा टीला अचानक ढह गया।
यह मलबा पहाड़ से नीचे की ओर बने मजदूरों के अस्थायी कैंप (Temporary Quarters) और खड़ी गाड़ियों पर आ गिरा।
घटना के समय साइट पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा था, लेकिन वहाँ इंजीनियर, सुरक्षाकर्मी और कुछ मजदूर मौजूद थे।
राहत की बात यह रही कि दिन का समय होने के कारण कई लोगों ने भागकर अपनी जान बचा ली। एक प्राइवेट बस और टैंकर को भी मलबे ने नदी में धकेल दिया।
इस भूस्खलन को केवल प्राकृतिक आपदा नहीं माना जा रहा है। केरल के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इसे ‘मानव-निर्मित आपदा’ करार दिया है।
अधिकारियों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) ने ठेकेदारों को पहले ही चेतावनी दी थी कि खुदाई से निकली मिट्टी को असुरक्षित तरीके से जमा न करें और इसे वहां से हटाएं।
लगातार बारिश के बीच उसी जमा हुई मिट्टी (Excavated earth) के खिसकने से यह हादसा हुआ है।
हादसे के तुरंत बाद एनडीआरएफ (NDRF), पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
अब तक 9 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
5 लोगों की तलाश अभी भी जारी है। पुलिस के स्निफर डॉग्स (खोजी कुत्ते) मिट्टी के नीचे दबे लोगों को सूंघकर ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बचाव कार्यों की निगरानी के लिए दो मंत्रियों को तुरंत वायनाड भेजा है।
भूस्खलन क्या है? भूस्खलन (Landslide) एक प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा है, जिसमें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण पहाड़ी ढलानों से चट्टानें, मिट्टी, मलबा या गाद नीचे की तरफ तेजी से खिसक जाते हैं।
मुख्य कारण:
प्राकृतिक कारण: भारी बारिश, बर्फ का पिघलना, भूकंप, ज्वालामुखी गतिविधियां और नदियों द्वारा पहाड़ों का कटाव।
मानवीय कारण: वनों की अंधाधुंध कटाई, अवैध खनन, अवैज्ञानिक तरीके से सड़क या बांध का निर्माण और अनियोजित शहरीकरण। वायनाड का यह हादसा इसी का एक उदाहरण है।
भूस्खलन के प्रकार: रॉक फॉल (चट्टानों का गिरना), स्लाइड (मिट्टी का खिसकना), मड फ्लो (कीचड़ का बहाव) और टॉपल (ऊपरी हिस्से का गिरना)।
बचाव और रोकथाम के उपाय:
पहाड़ी ढलानों पर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना (वनीकरण)।
कमजोर ढलानों को रोकने के लिए ‘रिटेनिंग वॉल’ (Retaining Wall) और जाल (Netting) का निर्माण।
पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए उचित ‘ड्रेनेज सिस्टम’ (Drainage System) बनाना।
संवेदनशील इलाकों की पहचान (जोखिम मानचित्रण) और वहां निर्माण कार्यों पर सख्त प्रतिबंध लगाना।
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