पीएम मोदी की अपील: 1 साल सोना न खरीदें, अपनाएं WFH
क्या फिर से लागू होगा Work From Home? जानिए PM मोदी ने क्यों की 1 साल तक सोना न खरीदने की अपील, समझिए पूरा अर्थशास्त्र”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भारी तनाव का सीधा असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जिंदगी पर पड़ने लगा है।
वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था के बाधित होने और कच्चे तेल की कीमतों के 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच जाने से महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
इसी आसन्न आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक जनसभा के दौरान देशवासियों से कई बड़ी और अहम अपीलें की हैं।
पश्चिम एशिया संकट और भारत पर असर
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधा आने से तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के महंगे होने से हमारा आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है और भारतीय रुपये पर दबाव आ गया है।
पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच सरकार ईंधन की खपत कम करने के विकल्प तलाश रही है।
क्या फिर से लौटने वाला है Work From Home?
ईंधन की खपत और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पीएम मोदी ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work From Home) का सुझाव दिया है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह कोरोना काल में देश ने घर से काम, वर्चुअल बैठकों और वीडियो संवाद की व्यवस्थाओं को अपनाया था, अब समय आ गया है कि उन तरीकों को फिर से अपनाया जाए। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि परिवहन लागत भी कम होगी।
इसके साथ ही पीएम ने जनता से अपील की है कि:
मेट्रो रेल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करें।
कार-पूलिंग जैसी शेयरिंग व्यवस्था अपनाएं।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता दें।
माल परिवहन (Freight) को सड़कों की बजाय रेलमार्ग से भेजें।
सोना खरीदने से क्यों मना कर रहे हैं पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री की सबसे अधिक चर्चा में रही अपील यह है कि ‘देशहित में नागरिकों को कम से कम एक वर्ष तक सोना (Gold) खरीदने से बचना चाहिए।’ इसके पीछे का अर्थशास्त्र समझना बेहद जरूरी है:
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में से एक है।
कच्चे तेल की तरह ही सोने का भुगतान भी विदेशी मुद्रा (अमेरिकी डॉलर) में किया जाता है।
जब तेल पहले से ही महंगा है, ऐसे में सोने का अधिक आयात होने से देश का डॉलर बाहर जाएगा, जिससे ‘चालू खाते का घाटा’ (Current Account Deficit) बढ़ेगा और रुपया और कमजोर होगा। यही कारण है कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने की खरीद टालने का आग्रह किया गया है।
विदेश यात्राओं और विदेशी शादियों पर रोक की अपील
सोने के अलावा, प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से अनावश्यक विदेश यात्राएं, विदेशी पर्यटन और विदेशों में आयोजित होने वाले ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ समारोहों को भी एक वर्ष तक टालने का आग्रह किया है ताकि देश का पैसा देश में ही रहे।
इसके अलावा खाद्य तेल की खपत घटाने, रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती व स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
विपक्ष का वार और सरकार का पलटवार
प्रधानमंत्री की इस अपील पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा है कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है और अब अपनी नाकामी का बोझ आम लोगों पर डाल रही है।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम की अपील को एक दूरदर्शी कदम बताया है, जो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश देश को संभावित वैश्विक आर्थिक संकट के लिए तैयार करने का एक बड़ा संकेत है।
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