मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा की लिथियम बैटरी को हैक कर वाहन को रोकने का प्रतीकात्मक चित्र।

ई-रिक्शा हैकिंग: मोबाइल ऐप से रोके जा रहे वाहन, जानें खतरा

ई-रिक्शा चालकों और यात्रियों के लिए बड़ा खतरा: मोबाइल ऐप से ‘हैक’ कर बीच सड़क पर रोके जा रहे वाहन; सोलर ग्रिड पर भी ब्लैकआउट का साया”

उज्जैन/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 

देश भर में लाखों की संख्या में दौड़ रहे ई-रिक्शा (E-Rickshaws) की सुरक्षा में एक बहुत बड़ी और जानलेवा तकनीकी खामी सामने आई है।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें हैकर्स या कुछ शरारती तत्व एक मोबाइल ऐप के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक रोक देते हैं।

 

यह सब ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाले ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ (BMS) में पावर सप्लाई को रिमोटली बंद करके किया जा रहा है।

इस मामले का बड़ा खुलासा तब हुआ, जब मध्य प्रदेश पुलिस ने महाकाल की नगरी उज्जैन से एक 18 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया, जो केवल वीडियो बनाने के शौक में ई-रिक्शा चालकों को हैकिंग के जरिए परेशान कर रहा था।

कैसे हैक हो रहे हैं ई-रिक्शा और क्या है खामी?

ई-रिक्शा में इस्तेमाल की जाने वाली लिथियम बैटरी को फोन से कनेक्ट करने के लिए इसमें एक ‘लो पावर ब्लूटूथ-इनेबल्ड डिवाइस’ लगा होता है।

  • BAT-BMS ऐप: ई-रिक्शा में चीनी कंपनी ‘Shenzhen Grenergy Technology’ द्वारा डेवलप किए गए BAT-BMS ऐप का इस्तेमाल होता है।

  • पासवर्ड की कमी: इस ऐप में डिफॉल्ट रूप से पासवर्ड ऑथेंटिकेशन (Password Authentication) नहीं होता है।

  • यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन का ब्लूटूथ ऑन करके 10-15 मीटर के दायरे में मौजूद ई-रिक्शा के ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ में आसानी से एंटर कर सकता है और बैटरी की पावर सप्लाई को ऑफ कर सकता है। ज्यादातर ई-रिक्शा चालकों को इस सिस्टम के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं है।

यात्रियों की जान को खतरा और हो रही अवैध वसूली

इस हैकिंग के कारण ई-रिक्शा की सवारी कर रहे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ गई है।

  • सड़क हादसों का डर: अगर कोई ई-रिक्शा तेज रफ्तार में चलते-चलते अचानक रुक जाए, तो उसमें बैठे यात्री झटके से सड़क पर गिर सकते हैं और किसी बड़े वाहन की चपेट में आकर हादसे का शिकार हो सकते हैं।

  • अवैध वसूली का खेल: कई जगहों से यह भी शिकायतें मिली हैं कि कुछ शरारती लोग बैटरी को ऐप से बंद कर देते हैं और फिर अनजान ई-रिक्शा चालक के पास पहुंचकर ‘सर्विस या ठीक करने’ के नाम पर 200 से 300 रुपये की अवैध वसूली कर रहे हैं।

सोलर ग्रिड (Solar Grid) पर भी मंडरा रहा है खतरा

टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ ई-रिक्शा ही नहीं, बल्कि ‘सोलर ग्रिड सिस्टम’ को भी इस खामी से निशाना बनाया जा सकता है।

हाइब्रिड और ऑफग्रिड सोलर प्लांट में इस्तेमाल की जाने वाली लिथियम बैटरी में भी BMS का उपयोग होता है।

अगर अपराधियों को सोलर ग्रिड में लगे BMS का एक्सेस मिल जाए, तो वे रिमोटली इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई बंद कर ‘ब्लैकआउट’ (Blackout) जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, सोलर कंपनियां सिस्टम लगाते समय आमतौर पर इसे पासवर्ड से लॉक कर देती हैं।

क्या है इसका समाधान और सरकार का एक्शन?

इस बड़े खतरे से निपटने के लिए कई कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है:

  • पासवर्ड का इस्तेमाल: ई-रिक्शा चालकों को अपने BMS सिस्टम को ‘यूजरनेम’ और ‘पासवर्ड’ (Two-Factor Authentication) के जरिए तुरंत लॉक करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे स्मार्टफोन को लॉक किया जाता है।

  • डीलर्स और RTO की जिम्मेदारी: ई-रिक्शा बेचने वाले डीलर्स और रजिस्ट्रेशन करने वाली RTO अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे चालकों को इस तकनीक और इसकी सुरक्षा के बारे में पूरी ट्रेनिंग दें।

इस घटना के सामने आने के बाद सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion जैसे मोबाइल ऐप्स को प्ले स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं, जिनका दुरुपयोग बैटरी वाहनों को रिमोट से बंद करने के लिए किया जा रहा था।

सरकार ने तीन ऐसे मोबाइल ऐप को हटाने का दिया आदेश

सरकार ने तीन ऐसे मोबाइल ऐप को हटाने का आदेश दिया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर सड़कों पर ई-रिक्शा या बैटरी से चलने वाले वाहनों को अचानक रोकने के लिए किया जा रहा था।

सूत्रों ने आगे बताया कि BAT-BMS, Lossigy और Epoch-i-ion जैसे तीन ऐप्स को हटाने का आदेश दिया गया है, और गलत इस्तेमाल हो रहे ऐसे किसी भी अन्य ऐप को भी ब्लॉक कर दिया जाएगा। 

ये ऐप्स कब उपलब्ध हुए?

ये ऐप्स विवाद शुरू होने से काफी पहले ही Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध थे और इन्हें बैटरी की जांच और मैनेजमेंट के लिए बनाया गया था।