इंडिया पोस्ट और कूरियर के जरिए पार्सल में छिपाकर ड्रग्स तस्करी और पुलिस की कार्रवाई का प्रतीकात्मक चित्र।

हैदराबाद: 21 राज्यों में स्पीड पोस्ट से गांजा तस्करी, सिंडिकेट का भंडाफोड़

हैदराबाद में 5 करोड़ के ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़: इंडिया पोस्ट और कूरियर से 21 राज्यों में हो रही थी ‘गांजे’ की होम डिलीवरी; WhatsApp पर लेते थे ऑर्डर”

हैदराबाद: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश में ड्रग्स तस्करी का एक ऐसा हाई-टेक और संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं।

तेलंगाना के हैदराबाद में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो ‘इंडिया पोस्ट’ (स्पीड पोस्ट) और प्राइवेट कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल करके देश के 21 राज्यों में ग्राहकों तक गांजे की होम डिलीवरी कर रहा था।

इस पूरी कार्रवाई को हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग (H-NEW) ने अंजाम दिया है। जांच में ई-कॉमर्स कंपनियों की तर्ज पर चल रहे एक बड़े ‘डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल’ का खुलासा हुआ है।

पोस्ट ऑफिस के पार्सल से खुला राज

इस रैकेट की जांच तब शुरू हुई, जब अधिकारियों ने झारखंड के ‘इसरी बाजार पोस्ट ऑफिस’ से हैदराबाद के एक ग्राहक के नाम बुक किया गया गांजे का एक संदिग्ध पार्सल पकड़ा।

कड़ियां जुड़ती गईं और ‘फुसरो बाजार पोस्ट ऑफिस’ से भेजे गए एक और कंसाइनमेंट का पता चला, जिसने पुलिस को इस देशव्यापी नेटवर्क तक पहुंचा दिया।

5 करोड़ का टर्नओवर: ई-कॉमर्स की तरह चल रहा था धंधा

पुलिस जांच के अनुसार, यह सिंडिकेट पूरी तरह से एक कॉर्पोरेट मॉडल की तरह काम कर रहा था:

  • रोजाना 100 ऑर्डर: यह गैंग रोजाना 80-100 ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करता था और 8-10 स्पीड पोस्ट पार्सल भेजता था।

  • पार्सल की कीमत: हर पार्सल में 50 से 250 ग्राम गांजा होता था, जिसकी कीमत 1,500 से 8,000 रुपये के बीच होती थी।

  • करोड़ों की कमाई: इस धंधे से रोजाना लगभग 1 लाख रुपये की कमाई होती थी। इसका मासिक टर्नओवर 30-35 लाख रुपये और सालाना कमाई 4-5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी।

सोशल मीडिया पर ऑर्डर, ‘दवाइयों’ के नाम पर डिलीवरी

  • ऑर्डर लेने के लिए WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया जाता था और पेमेंट पूरी तरह से UPI के जरिए होता था।

  • पार्सल को ट्रेन और एयर कार्गो (हवाई मार्ग) से भेजा जाता था।

  • सुरक्षा जांच (स्क्रीनिंग) से बचने के लिए पार्सल के ऊपर डिब्बे में मौजूद सामान को ‘दवाइयां’ (Medicines) बताया जाता था।

‘मैंगो’, ‘स्टिक’ और ‘फ्लावर’ थे कोडवर्ड

हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने बताया कि यह गैंग झारखंड में उगाए गए गांजे को तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और कर्नाटक समेत 21 राज्यों में बांटता था।

अकेले मुंबई में इस गैंग के 1,000 से ज्यादा रेगुलर ग्राहक थे। गांजे की अलग-अलग मात्रा के लिए तस्कर “मैंगो”, “स्टिक” और “फ्लावर” जैसे सीक्रेट कोड का इस्तेमाल करते थे।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 4 की तलाश जारी

इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड सत्यम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। सत्यम ने आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी और 2018 में गांजे की लत लगने के बाद ड्रग्स का धंधा शुरू कर दिया।

वह काली कमाई को बैंक अकाउंट्स (अपनी मां के अकाउंट सहित) में घुमाकर सोने और लग्जरी गाड़ियों में इन्वेस्ट करता था।

पुलिस ने हैदराबाद के दो खरीददारों (सुशांत व्यास और लड्डू) को भी 2 किलो गांजे के साथ दबोचा है।

फिलहाल, इस गिरोह के चार अन्य सदस्य— शुभम मिश्रा (सत्यम का भाई), राहुल झा, सचिन मिश्रा और संतोष पंडित अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। हैदराबाद पुलिस ने पोस्टल और कूरियर चैनलों की निगरानी भी सख्त कर दी है।