“वर्ष 2026 की शुरुआत एक ऐसी घटना से हुई है जिसने वैश्विक राजनीति की नींव हिला दी है”
वॉशिंगटन/प्योंगयांग/मास्को 04 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर चलाए गए ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया है। इस कार्रवाई ने शीत युद्ध के बाद का सबसे बड़ा तनाव पैदा कर दिया है।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन का बयान रहा। किम जोंग ने मादुरो को अपना “करीबी मित्र और भाई” बताते हुए अमेरिका को सीधे तौर पर ललकारा है।
विश्व युद्ध की चेतावनी: किम जोंग ने कहा, “अमेरिका की यह डाकू जैसी हरकत अंतरराष्ट्रीय कानून का मखौल उड़ाती है। यदि मादुरो को तुरंत ससम्मान रिहा नहीं किया गया, तो दुनिया एक ऐसे विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ेगी जिसे अमेरिका रोक नहीं पाएगा।”
आंतरिक मामलों में दखल: प्योंगयांग से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका किसी भी संप्रभु राष्ट्र के नेता को अपराधी की तरह नहीं उठा सकता।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस कार्रवाई को ‘अवैध सैन्य अपहरण’ करार दिया है।
रूस का रुख: क्रेमलिन ने चेतावनी दी है कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रूस ने मांग की है कि वेनेजुएला का भविष्य वहां की जनता तय करे, न कि वॉशिंगटन।
चीन का बयान: बीजिंग ने अमेरिका पर ‘वर्चस्ववादी राजनीति’ का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए आत्मघाती साबित होगा।
वेनेजुएला की सीमाओं पर तनाव अपने चरम पर है:
कोलंबिया: सुरक्षा के मद्देनजर अपनी सीमाओं को सील कर दिया है और हजारों सैनिकों को तैनात किया है।
ब्राजील और मेक्सिको: इन देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है, हालांकि वे सैन्य संघर्ष से बचने की अपील कर रहे हैं।
क्षेत्रीय एकता: क्यूबा और निकारागुआ जैसे देशों ने अमेरिका के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बनाने का आह्वान किया है।
| देश | रुख | मुख्य मांग/टिप्पणी |
| अमेरिका | आक्रामक | मादुरो को नार्को-टेररिज्म के लिए सजा दी जाए। |
| उत्तर कोरिया | धमकी भरा | मादुरो की रिहाई न होने पर ‘गंभीर वैश्विक परिणाम’। |
| रूस | कूटनीतिक/सैन्य | संयुक्त राष्ट्र में विरोध और सैन्य हस्तक्षेप का विरोध। |
| कोलंबिया | रक्षात्मक | सीमा सुरक्षा और शांति की अपील। |
| जर्मनी/स्पेन | निंदात्मक | अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर चिंता। |
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने वेनेजुएला में अंतरिम सरकार बिठाने की कोशिश की और रूस या उत्तर कोरिया ने वहां अपनी सैन्य संपत्ति भेजी, तो यह एक ‘प्रॉक्सि वॉर’ से बढ़कर सीधे टकराव में बदल सकता है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका: वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पूरी तरह विभाजित नजर आ रही है। वीटो पावर रखने वाले देशों के बीच इस टकराव ने संगठन की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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