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विशेष रिपोर्ट: ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’और वैश्विक महाशक्तियों का टकराव

“3 जनवरी, 2026 की रात वेनेजुएला के इतिहास और वैश्विक राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुई”

वॉशिंगटन/कराकस/प्योंगयांग 04 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनिया को स्पष्ट रूप से दो गुटों में बांट दिया है। जहाँ एक तरफ तानाशाही के अंत का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे “अंतरराष्ट्रीय डकैती” बताते हुए तीसरे विश्व युद्ध की चेतावनी दी जा रही है।

1. रात 2 बजे का ‘बिजली जैसा’ हमला

अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के अनुसार, इस मिशन का कोडनेम ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ था।

  • हमला: कराकस, मिरांडा और ला गुइरा समेत चार प्रमुख शहरों पर 150 से अधिक लड़ाकू विमानों (F-22, F-35) और ड्रोन ने हमला किया।

  • गिरफ्तारी: जिस वक्त मादुरो एक मिलिट्री बेस में सो रहे थे, अमेरिकी विशेष बलों (Special Forces) ने उन्हें और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया। उन्हें तुरंत न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहाँ उन पर ‘नार्को-टेररिज्म’ के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

2. किम जोंग उन की ‘परमाणु’ चेतावनी

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने इस मामले में सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने मादुरो को अपना ‘भाई और सच्चा दोस्त’ बताते हुए कहा:

“अगर मादुरो को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो अमेरिका को ऐसे परिणामों का सामना करना होगा जो उसने कभी सपने में भी नहीं सोचे होंगे। यह कदम दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग में झोंक सकता है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग का यह बयान अमेरिका पर दबाव बनाने और रूस-चीन के साथ मिलकर एक नया मोर्चा खोलने की कोशिश है।

3. वैश्विक ध्रुवीकरण: कौन किसके साथ?

गुट देश मुख्य प्रतिक्रिया / तर्क
अमेरिका समर्थक अर्जेंटीना, इक्वाडोर, इज़राइल “नार्को-तानाशाही का अंत”, “आजादी की नई सुबह”।
वेनेजुएला समर्थक रूस, उत्तर कोरिया, ईरान, क्यूबा, चीन “सशस्त्र आक्रामकता”, “संप्रभुता का अपहरण”, “युद्ध की धमकी”।
क्षेत्रीय निंदा ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन”, सीमा पर सेना की तैनाती।
तटस्थ/सावधानी ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, इटली, इंडोनेशिया “तथ्यों का इंतजार”, “नागरिकों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता”।

4. रूस और चीन का ‘काउंटर-प्लान’

रूस ने इसे ‘अवैध अपहरण’ करार दिया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठक बुलाई है। रूस का कहना है कि किसी भी देश की चुनी हुई सरकार को इस तरह उखाड़ना भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल है। चीन ने इसे ‘अमेरिकी वर्चस्ववाद’ का प्रतीक बताते हुए कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी है।

5. आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव

  • तेल का खेल: ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब वेनेजुएला का संचालन करेगा ताकि वहां के तेल संसाधनों को सुरक्षित किया जा सके। इससे वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है।

  • शरणार्थी संकट: कोलंबिया और ब्राजील ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि वेनेजुएला में गृहयुद्ध छिड़ने पर लाखों लोग पलायन कर सकते हैं।


क्या युद्ध अपरिहार्य है?

वर्तमान स्थिति 1962 के ‘क्यूबन मिसाइल संकट’ की याद दिलाती है। यदि रूस या उत्तर कोरिया ने वेनेजुएला के समर्थन में कोई सैन्य कदम उठाया, तो यह सीधे तौर पर अमेरिका के साथ युद्ध की शुरुआत हो सकती है।

अगला अपडेट: कल होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

Santosh SETH

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