'द पॉलिटिक्स अगेन' की खास रिपोर्ट: चांद पर पहुंचने वाला देश आज भी अपने नागरिकों को दिवाली-छठ पर सम्मानजनक तरीके से घर पहुंचाने में नाकाम है। स्टेशनों पर भगदड़ और फ्लाइट-बसों में मची है खुली लूट। (ग्राफिक्स: द पॉलिटिक्स अगेन)
स्पेशल रिपोर्ट: चांद पर पहुंचने वाला देश ‘छठ-दिवाली’ पर अपनों को घर पहुंचाने में नाकाम! ट्रेनों में ठुंसते लोग, फ्लाइट-बसों की खुली लूट”
The Politics Again डेस्क (संपादकीय): संतोष सेठ
परदेस में पसीना बहाते हर इंसान के लिए साल के 365 दिन एक तरफ और दिवाली-छठ के वो चार दिन एक तरफ होते हैं। सीने में धड़कता बस एक ही सपना होता है— ‘घर लौटना’।
लेकिन इस मुल्क में एक आम परदेसी के लिए त्योहार पर घर लौटने का रास्ता किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है।
महीनों पहले से कन्फर्म टिकट का संघर्ष, तत्काल के लिए दलालों से जंग और फिर स्टेशनों पर उमड़ता इंसानों का सैलाब— यह कहानी हर साल दोहराई जाती है, लेकिन इसका समाधान किसी भी सरकार के पास नहीं है।
कल्पना कीजिए, रात के 9:15 की ट्रेन है, गोदी में 8 महीने का मासूम बच्चा और साथ में पत्नी। नई दिल्ली स्टेशन के बाहर सड़क तक फैली यात्रियों की अनगिनत कतारें देखकर पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है।
तभी एक कुली आता है और कहता है, “भईया, इस लाइन में खड़े रहे तो ट्रेन छूट जाएगी। 500 रुपये दीजिए, सीधे प्लेटफॉर्म पर उतार देंगे।”
बिना किसी भारी सामान के सिर्फ भीड़ से बचकर प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए दिए गए वो 500 रुपये, उस कुली की मेहनत नहीं, बल्कि दरवाजे पर आँखें बिछाए बैठी बूढ़ी माँ की उम्मीदों को ज़िंदा रखने की कीमत बन जाते हैं।
विडंबना देखिए, भारत उन चुनिंदा विकसित देशों में से है जिसने चांद और मंगल पर पहुंचने का रास्ता खोज लिया है।
लेकिन हाईटेक टेक्नोलॉजी के इस दौर में हम ऐसी कोई तकनीक विकसित नहीं कर पाए, जिससे देश का एक आम नागरिक जनरल या स्लीपर बोगी में एक सीट पर डिग्निटी (सम्मान) के साथ बैठकर सफर कर सके।
त्योहारों के पंचांग साल भर पहले छपते हैं, रेलवे के पास हर रूट का ‘रियल-टाइम डेटा’ होता है कि दिल्ली-पटना, मुंबई-दरभंगा या सूरत-गोरखपुर रूट पर मांग 400% बढ़ जाती है। फिर भी ‘क्राइसिस मैनेजमेंट’ आखिरी हफ्ते में क्यों शुरू होता है?
खड़े होने की जगह की लड़ाई तो ट्रेन आने के बाद शुरू होती है, असली जंग तो सुबह 10 और 11 बजे ‘तत्काल टिकट’ की खिड़की (ऑनलाइन) पर लड़ी जाती है।
आम इंसान उंगलियां थामकर बैठता है, और दो मिनट के भीतर सारी सीटें गायब हो जाती हैं। दलाल अपने अवैध ऑटोमेटेड बॉट सॉफ्टवेयर के जरिए पूरा कोटा मिनटों में हड़प जाते हैं।
रेल मंत्री भले ही 3 करोड़ फर्जी IRCTC अकाउंट्स हटाने का दावा करें, लेकिन दलालों का धंधा खत्म नहीं हुआ, बस पैंतरे बदल गए हैं।
अगर ट्रेन का टिकट न मिले, तो मजबूर इंसान फ्लाइट या प्राइवेट बसों की तरफ दौड़ता है। लेकिन वहां खुली लूट मची है:
फ्लाइट का किराया: 10 नवंबर के आसपास दिल्ली से पटना का हवाई किराया लगभग 20,000 रुपये तक पहुँच चुका है।
प्राइवेट बसें: जिन बसों का किराया आम दिनों में 1,000-1,500 रुपये होता है, वह सीधे 4,000 से 5,000 रुपये प्रति सवारी वसूल रही हैं।
सरकार ने आज तक फ्लाइट के ‘डायनामिक फेयर’ और प्राइवेट बसों की मनमानी वसूली पर कोई लगाम क्यों नहीं लगाई?
15,000 रुपये महीना कमाने वाला मजदूर सिर्फ एक बार घर जाने के लिए अपनी पूरी कमाई किराये में क्यों फूंक दे?
सरकार हर साल रिकॉर्ड संख्या में ‘स्पेशल ट्रेनें’ चलाने का दावा करती है। लेकिन अगर ट्रेनें पर्याप्त हैं, तो फिर स्टेशनों पर भगदड़ क्यों मच रही है?
भीड़ को कंट्रोल करने के लिए दिल्ली-NCR के 6 बड़े स्टेशनों पर 14 नवंबर तक प्लेटफॉर्म टिकट बैन करने पड़े हैं।
सबसे बड़ा सवाल रेलवे की प्राथमिकताओं पर है। क्यों जनरल और स्लीपर कोचों की संख्या लगातार घटाकर केवल एसी (AC) कोचों को प्राथमिकता दी जा रही है?
त्योहारों पर घर लौटने वाला सबसे बड़ा तबका वही अकुशल मजदूर और मध्यम वर्ग है, जिसकी जेब एसी के टिकट का बोझ नहीं उठा सकती।
यह सिर्फ एक टिकट की मारामारी नहीं है, यह एक आम नागरिक की गरिमा का सवाल है। जो इंसान साल के 360 दिन परदेस में रहकर इस देश के विकास की रीढ़ बना हुआ है,
क्या वह साल में सिर्फ एक बार अपने बूढ़े मां-बाप के चरण छूने और बच्चों के साथ दीया जलाने का हक भी खो चुका है?
| यात्रा का माध्यम (Mode) | आम आदमी की समस्या और लूट की हकीकत |
| रेलवे (तत्काल टिकट) | सुबह 10-11 बजते ही 2 मिनट में सीटें फुल, दलालों के बॉट सॉफ्टवेयर का कब्जा। |
| ट्रेनों की स्थिति | जनरल/स्लीपर कोचों की घटती संख्या, ट्रेनों में जानवरों की तरह ठुंसकर सफर। |
| हवाई सफर (Flight) | दिल्ली से पटना जैसे रूट पर किराया ₹20,000 तक पहुंचा। कोई सरकारी कैप (Limit) नहीं। |
| प्राइवेट बसें | ₹1,000 का टिकट ₹4,000 से ₹5,000 में, खुली मनमानी और वसूली। |
| प्रशासनिक कदम | भीड़ नियंत्रण के लिए दिल्ली-NCR के 6 बड़े स्टेशनों पर 14 नवंबर तक प्लेटफॉर्म टिकट बैन। |
वाराणसी: धनतेरस पर स्वर्णमयी स्वरूप में भिक्षा दे रही हैं 'मां अन्नपूर्णा', भक्तों में बांटा…
दिवाली-छठ पर अलर्ट मोड में UP स्वास्थ्य विभाग: CM योगी के निर्देश, '24 घंटे खुले…
दिवाली-छठ की भीड़ के बीच एक्शन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव: नई दिल्ली स्टेशन का…
महाराष्ट्र में NCP के दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज: प्रफुल्ल पटेल ने अस्पताल…
पंजाब के राजपुरा में बड़ा ट्रेन हादसा: 'कर्मभूमि एक्सप्रेस' के 4 डिब्बों में लगी भीषण…
उत्तर प्रदेश में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा: 2027 के चुनाव की बिसात…