केरल चुनाव का ऐलान: 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान, 4 मई को आएँगे नतीजे | The Politics Again
‘केरल विधानसभा चुनाव का शंखनाद : 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान, 4 मई को नतीजे; LDF और कांग्रेस में सीधी टक्कर ‘
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा आज शाम 4 बजे की गई बहुप्रतीक्षित प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही केरल में चुनावी रणभेरी बज गई है।
चुनाव आयोग ने केरल सहित पाँच राज्यों के चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही राज्य में ‘आदर्श चुनाव आचार संहिता’ (MCC) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
अंतिम मतदाता सूची पहले ही जारी की जा चुकी है, और अब सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन (LDF) और विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (UDF) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है।
केरल चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम (एक नज़र में)
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, भौगोलिक और सुरक्षा दृष्टि से अनुकूल होने के कारण केरल में मतदान की प्रक्रिया को बेहद सुगमता से एक ही दिन में संपन्न कराया जाएगा:
मतदान की तिथि: 9 अप्रैल 2026 (सभी 140 विधानसभा सीटों पर एक साथ)
चरण: केवल एक (Single Phase)
मतगणना और नतीजे: 4 मई 2026
कांग्रेस की तैयारी: “जल्द आएगी उम्मीदवारों की लिस्ट”
तारीखों का ऐलान होते ही विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। केरल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.डी. सतीशन ने कोच्चि में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पार्टी की रणनीतियों का खुलासा किया है।
सीट बंटवारे पर सहमति: सतीशन ने स्पष्ट किया है कि गठबंधन (UDF) के साथियों के साथ सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है और बातचीत अपने आखिरी दौर में है।
चरणबद्ध घोषणा: उन्होंने बताया कि पार्टी अब अलग-अलग चरणों में अपने उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा करेगी। कांग्रेस केवल चुनाव आयोग के कार्यक्रम का इंतजार कर रही थी।
केरल का राजनीतिक समीकरण: ‘रिवाज’ बनाम ‘इतिहास’
केरल की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है। यहाँ मुख्य मुकाबला सत्ताधारी वामपंथी दलों (LDF) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (UDF) के बीच ही रहता है।
क्या है राज्य का रिवाज? केरल में आमतौर पर हर पांच साल में सत्ता बदलने का राजनीतिक ‘रिवाज’ रहा है (एक बार LDF, एक बार UDF)।
विजयन का ‘इतिहास’: हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में वामपंथियों ने इस रिवाज को तोड़ते हुए दोबारा सत्ता हासिल कर इतिहास रच दिया था।
वर्तमान स्थिति: इस बार जहाँ वामपंथी दल अपने विकास कार्यों के दम पर सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं, वहीं विपक्षी कांग्रेस हालिया लोकसभा चुनाव के बेहतर नतीजों से भारी उत्साह में है और सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है।
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