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जौनपुर की बेटी खो गई अनंत आकाश में: अजित पवार के साथ प्लेन क्रैश में पिंकी माली की भी मौत

“महाराष्ट्र के बारामती में हुए जिस भीषण विमान हादसे ने देश से उसका एक दिग्गज नेता (अजित पवार) छीन लिया, उसी हादसे ने जौनपुर के एक पिता से उसकी लाडली भी छीन ली”

जौनपुर/मुंबई: “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

हादसे में जान गंवाने वाली केबिन क्रू (Cabin Crew) पिंकी माली मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की रहने वाली थीं।

29 साल की पिंकी ने उड़ान भरने से पहले अपने पिता से वादा किया था कि वह उनकी बात ‘अजित दादा’ से कराएंगी, लेकिन अब वह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है।

जौनपुर से मुंबई तक का सफर

पिंकी माली का पैतृक घर जौनपुर जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर केराकत तहसील के भैंसा गांव में है।

उनके पिता शिव कुमार माली पिछले 35 सालों से मुंबई में टैक्सी चलाते हैं और वहां शिवसेना के नेता भी हैं।

गांव के अशोक सिंह और चचेरे भाई शीतला प्रसाद ने बताया कि पिंकी का परिवार हर साल गांव आता था और दुर्गा पूजा करवाता था।

पिंकी की शादी बस्ती जिले में हुई थी, लेकिन वह अपने करियर को लेकर बहुत समर्पित थीं। वह मुंबई के वरली (सेंचुरी क्वार्टर) में रहती थीं।

पिता से आखिरी वादा और मां का ‘सिक्स्थ सेंस’

हादसे के बाद पिंकी के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • पिता का दर्द: शिव कुमार माली ने बताया, “कल उसने आखिरी बार कहा था कि वह दादा (अजित पवार) के साथ बारामती और फिर नांदेड़ जाएगी। वह बहुत खुश थी और उसने कहा था कि वह मेरी बात अजित दादा से कराएगी।”

  • मां की बेचैनी: मां माया माली ने रोते हुए कहा, “मेरा मन सुबह से घबरा रहा था। वह रोज सुबह फोन करके कहती थी- ‘मम्मी नाश्ता कर लो, दवा खा लो’। आज उसका फोन नहीं आया, तो मुझे लगा कुछ अनहोनी हुई है।”

वीआईपी उड़ानों का हिस्सा थी पिंकी

पिंकी माली एक अनुभवी फ्लाइट अटेंडेंट थीं। इससे पहले भी वह देवेंद्र फडणवीस और नारायण राणे जैसे बड़े नेताओं के साथ उड़ान भर चुकी थीं। परिवार ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

कैसे हुआ हादसा?

महाराष्ट्र एविएशन डिपार्टमेंट के अनुसार, विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग की कोशिश कर रहा था।

पहली बार में रनवे साफ नहीं दिखा तो पायलट ने ‘गो-अराउंड’ (Go-around) किया। दूसरी बार रनवे-11 पर लैंडिंग के दौरान विमान फिसल गया और आग के गोले में तब्दील हो गया।

एक तरफ महाराष्ट्र अपने नेता को खोने का गम मना रहा है, तो दूसरी तरफ जौनपुर का भैंसा गांव अपनी होनहार बेटी के लिए मातम में है।

पिंकी की कहानी याद दिलाती है कि बड़ी हेडलाइन्स के पीछे भी कई ऐसे परिवार होते हैं, जिनकी दुनिया हमेशा के लिए उजड़ जाती है।

Santosh SETH

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