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जौनपुर में पोंजी स्कीम पीड़ितों का हल्ला बोल: “साहब! 2 लाख आवेदन धूल फांक रहे, हमारा पैसा कब मिलेगा?”; कलेक्ट्रेट में जबरदस्त प्रदर्शन

“जिले में चिटफंड और पोंजी कंपनियों (Ponzi Schemes) की ठगी के शिकार हजारों लोगों का धैर्य अब जवाब दे गया है”

जौनपुर “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट 

बुधवार को ‘ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार’ (TAPJP) के बैनर तले सैकड़ों निवेशकों और एजेंटों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार के स्पष्ट कानून (BUDS Act 2019) होने के बावजूद जौनपुर प्रशासन ने भुगतान के लिए कोई खिड़की (Window) नहीं खोली है, जबकि 2 लाख पुराने आवेदन रद्दी की टोकरी में पड़े हैं।

कानून है, पर कार्रवाई नहीं

संगठन के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार बिंद ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “भारत सरकार का ‘BUDS Act 2019’ और यूपी का ‘जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम’ साफ कहता है कि ठगी के शिकार लोगों का पैसा वापस दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार ने ADM (वित्त एवं राजस्व) को इसके लिए नोडल अधिकारी भी बनाया है, लेकिन जौनपुर में अधिकारी कान में तेल डालकर बैठे हैं।”

अन्य जिलों में काम शुरू, जौनपुर में सन्नाटा

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में प्रशासन ने भुगतान के लिए स्पेशल काउंटर खोल दिए हैं और पुराने आवेदनों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। लेकिन जौनपुर में स्थिति इसके उलट है:

  1. जिलाधिकारी को बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी कोई भुगतान विंडो नहीं खुली।
  2. दो साल पहले जमा कराए गए 2 लाख आवेदनों पर आज तक एक भी कदम आगे नहीं बढ़ा।
  3. ऑनलाइन पोर्टल भी बंद पड़ा है, जिससे पीड़ितों के पास कोई रास्ता नहीं बचा।

आमने-सामने एजेंट और निवेशक

प्रशासन की इस निष्क्रियता ने सामाजिक तनाव पैदा कर दिया है। निवेशक अपना पैसा वापस मांग रहे हैं और वे अब अभिकर्ताओं (Agents) के घर पहुंचकर दबाव बना रहे हैं।

इससे अभिकर्ताओं और जमाकर्ताओं के बीच झगड़े और तनाव की स्थिति बन गई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।

प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। उनकी एक ही मांग है—कानून का पालन हो और जौनपुर में तत्काल भुगतान काउंटर खोला जाए।

⚖️ जानिए क्या है BUDS Act 2019? (आपका अधिकार)

‘बड्स एक्ट’ (Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019) मोदी सरकार द्वारा लाया गया एक सख्त कानून है।

  • पैसा वापसी की गारंटी: यह कानून प्रशासन को अधिकार देता है कि वह ठग कंपनी की संपत्ति कुर्क (Zapt) करके निवेशकों का पैसा लौटाए।

  • समय सीमा: कानून के मुताबिक, सक्षम अधिकारी को एक तय समय सीमा (180 दिन) के भीतर भुगतान प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

  • सक्षम अधिकारी: जिले में ADM (वित्त/राजस्व) या DM ही इसके सक्षम अधिकारी होते हैं, जिनके पास आप क्लेम फाइल कर सकते हैं।

Santosh SETH

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