Students Support UGC Jaunpur

जौनपुर: “UGC उच्च शिक्षा की रीढ़ है”- छात्रों ने किया प्रदर्शन, आरक्षण और छात्रवृत्ति नीतियों का किया खुला समर्थन

“सोमवार को जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर छात्रों के नारों से गूंज उठा, लेकिन यह प्रदर्शन किसी विरोध के लिए नहीं, बल्कि समर्थन के लिए था”

जौनपुर | मंगेश प्रजापति की रिपोर्ट : The Politics Again ब्यूरो

विभिन्न वर्गों के सैकड़ों छात्रों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समर्थन में लामबंद होकर प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा।

छात्रों का कहना है कि यूजीसी की नीतियां ही देश में शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक समानता की गारंटी हैं।

“समानता और अवसर का दूसरा नाम UGC”

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता लकी गौतम ने कहा,

“यूजीसी महज एक संस्था नहीं, बल्कि भारत सरकार द्वारा स्थापित वह वैधानिक ढांचा है जो देश में उच्च शिक्षा के मानकों को तय करता है। इसकी नीतियां यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी छात्र के साथ जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो।”

आरक्षण और समावेशी शिक्षा पर जोर

छात्रों ने यूजीसी द्वारा लागू आरक्षण रोस्टर की सराहना की। उन्होंने बताया कि आयोग संवैधानिक प्रावधानों के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के हितों की रक्षा करता है।

साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण देकर समाज के हर तबके को मुख्यधारा में लाने का काम कर रहा है।

ड्रॉप-आउट रोकने में छात्रवृत्ति की भूमिका

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूजीसी की फेलोशिप और स्कॉलरशिप योजनाओं को गरीब छात्रों के लिए वरदान बताया।

उनका कहना था कि ये आर्थिक सहायता योजनाएं ही हैं जो अभावग्रस्त प्रतिभाशाली छात्रों को पढ़ाई छोड़ने (Drop-out) से बचाती हैं और उन्हें रिसर्च व उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का मौका देती हैं।

फीस नियंत्रण और गुणवत्ता

ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि यूजीसी निजी संस्थानों की मनमानी फीस पर लगाम लगाने और डिग्रियों की मान्यता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

छात्रों ने मांग की कि यूजीसी की स्वायत्तता और नीतियों को और सशक्त बनाया जाए ताकि राष्ट्र निर्माण में शिक्षित युवाओं की भागीदारी बढ़ती रहे।