ब्रिक्स 2026: भारत की सफल कूटनीति से इस्लामाबाद में सन्नाटा
ब्रिक्स 2026: नई दिल्ली में वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा, भारत की कूटनीतिक ताकत देख पाकिस्तान में पसरा सन्नाटा”
नई दिल्ली: संतोष सेठ, संपादक (THE POLITICS AGAIN)
राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की धमक पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान के सत्ता और रक्षा प्रतिष्ठानों में इसे लेकर भारी बेचैनी और सन्नाटा पसरा हुआ है।
जैसे-जैसे वैश्विक नेता भारत की धरती पर उतर रहे हैं, शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर सहित पूरे इस्लामाबाद की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
यह सम्मेलन पाकिस्तान के लिए इसलिए भी असहज करने वाला है क्योंकि यहां चीन, ईरान और सऊदी अरब जैसे उसके अपने रणनीतिक साझेदार भी भारत के मंच पर मौजूद हैं।
भारत-चीन की बढ़ती नजदीकी से घबराया इस्लामाबाद
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात है। सात साल बाद शी जिनपिंग का भारत आना एक बड़ा संकेत है।
पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति हमेशा से इस धारणा पर टिकी रही है कि भारत को चीन और पाकिस्तान के दो मोर्चों पर एक साथ उलझाए रखा जा सकता है।
यदि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझता है और रिश्ते सामान्य होते हैं, तो पाकिस्तान का यह रणनीतिक गणित पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।
भविष्य के किसी भी संघर्ष में चीन के प्रत्यक्ष समर्थन के बिना पाकिस्तान का मैदान में टिकना नामुमकिन हो जाएगा।
रूस के साथ रक्षा सौदे और एस-400 का खौफ
दूसरा बड़ा कारण मोदी-पुतिन समीकरण है। दोनों नेताओं के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अंतिम यूनिट की डिलीवरी और ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल के उन्नत संस्करण पर चर्चा हो रही है।
भारत को पहले ही चार S-400 रेजीमेंट मिल चुकी हैं। पिछले भारत-पाक सैन्य संघर्षों में रूसी एस-400 ने पाकिस्तानी हमलों को पूरी तरह बेअसर कर दिया था।
अब भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता में हो रहा इजाफा पाकिस्तान की सैन्य गणना को और कठिन बना रहा है।
ईरान और सऊदी अरब से भारत की गहरी दोस्ती
पाकिस्तान की चिंता पश्चिम एशिया को लेकर भी है। ब्रिक्स में सऊदी अरब और ईरान दोनों प्रमुख देश मौजूद हैं।
एक तरफ भारत के खाड़ी देशों, विशेषकर सऊदी अरब के साथ रिश्ते लगातार गहरे हो रहे हैं, तो वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं।
यदि भारत की मध्यस्थता से पश्चिम एशिया में स्थिति सुधरती है, तो पाकिस्तान की वह कूटनीतिक कवायद धरी की धरी रह जाएगी जिसके तहत उसने मक्का पैक्ट में हिस्सा लिया था।
ब्रिक्स सदस्यता की राह में भारत का वीटो
इन सबके अलावा, पाकिस्तान खुद ब्रिक्स का सदस्य बनना चाहता है, लेकिन इसके विस्तार के लिए सर्वसम्मति जरूरी है और भारत की कड़ी आपत्ति उसके लिए सबसे बड़ी बाधा है।
पाकिस्तानी मीडिया में इस वक्त पीएम मोदी की सफल कूटनीति और अपनी सरकार की विफलताओं पर खुलकर चर्चा हो रही है।
कुल मिलाकर, दिल्ली का ब्रिक्स सम्मेलन बदलते दक्षिण एशियाई शक्ति-संतुलन का वह आईना बन गया है, जिसने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है।











